May 4, 2026

लिपुलेख पर फिर गरमाया विवाद: कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर नेपाल का कड़ा विरोध, भारत-चीन को भेजा प्रोटेस्ट नोट

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नई दिल्ली। नेपाल ने एक बार फिर Lipulekh Pass को लेकर भारत और चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। काठमांडू ने 2026 की Kailash Mansarovar Yatra यात्रा को लिपुलेख मार्ग से कराने की योजना पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

नेपाल का कहना है कि यह क्षेत्र उसके “अभिन्न भूभाग” का हिस्सा है और यहां किसी भी तरह की गतिविधि उसके बिना सहमति के स्वीकार नहीं की जाएगी।

नेपाल का कड़ा संदेश
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत और चीन दोनों को प्रोटेस्ट नोट भेजते हुए स्पष्ट किया है कि लिपुलेख क्षेत्र पर उसका ऐतिहासिक और कानूनी दावा है। काठमांडू का आरोप है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर उसे न तो जानकारी दी गई और न ही उसकी सहमति ली गई।

भारत की यात्रा योजना
भारत सरकार ने घोषणा की है कि 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी। इस दौरान यात्रियों के लिए दो मार्ग तय किए गए हैं—सिक्किम का नाथू ला और उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है।

सीमा विवाद की पुरानी जड़ें
इस विवाद की जड़ें 1816 की Treaty of Sugauli से जुड़ी हैं। नेपाल का दावा है कि काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा से है, जिससे लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र उसके हिस्से में आते हैं।
वहीं भारत का कहना है कि नदी का वास्तविक स्रोत पूर्व की ओर है और यह क्षेत्र भारतीय प्रशासन के अंतर्गत आता है। 1962 के युद्ध के बाद भारत ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की थी।

2020 में बढ़ा तनाव
मई 2020 में भारत द्वारा धारचूला-लिपुलेख सड़क परियोजना के उद्घाटन के बाद नेपाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और नया राजनीतिक नक्शा जारी कर इन क्षेत्रों को अपने हिस्से में दिखाया था।

चीन भी बना अहम पक्ष
इस विवाद में चीन भी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। 2015 और 2025 में भारत-चीन के बीच इस दर्रे को व्यापार और यात्रा के लिए खोलने पर सहमति बनी थी, जिसमें नेपाल शामिल नहीं था। इसी वजह से काठमांडू की नाराजगी और बढ़ती जा रही है।

नेपाल ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर लगातार उठाता रहेगा। हालांकि भारत और चीन की रणनीतिक प्राथमिकताओं को देखते हुए इस विवाद का समाधान फिलहाल आसान नजर नहीं आता।

फिलहाल यह मुद्दा एक बार फिर हिमालयी राजनीति और दक्षिण एशिया के कूटनीतिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है।

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