फ्रांस में फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार
गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को सबसे बड़ा प्रदर्शन पेरिस में हुआ, जहां करीब 1 लाख 10 हजार लोग मार्च में शामिल हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।
पेरिस में मार्च के दौरान पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
प्रशासन ने पेरिस में प्रदर्शन का मार्ग शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित रखा था। मार्च पोर्त द’इटली से शुरू होकर पोर्त द विन्सेन्स तक पहुंचा। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्लास द ला नासियों की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ स्थानों पर तनाव बढ़ गया और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस तथा पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
पेरिस अभियोजक कार्यालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शन के सिलसिले में 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 40 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया। गिरफ्तार लोगों में छह नाबालिग भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर पर हथियार रखने या हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की तैयारी करने वाले समूहों में शामिल होने का संदेह है।
लियोन, स्ट्रासबर्ग और मार्सेय में भी तनाव
पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। नीस और नांतेस में पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को तैनात किया गया। मार्सेय में प्रदर्शन के अंतिम हिस्से के पास कुछ दर्जन लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पहले ही देशभर में 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती का ऐलान किया था। सुरक्षा व्यवस्था के तहत हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को भी लगाया गया।
यह प्रदर्शन पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद हुआ है। इससे पहले शनिवार को 5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। उस दौरान फ्रांसभर में करीब 3 हजार दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था या उन्हें लूट लिया गया था।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी और महंगाई के खिलाफ आंदोलन
फ्रांस में यह आंदोलन पिछले महीने पेरिस के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक हाई स्कूल में कर्मचारियों की कमी के विरोध से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, जबकि कर्मचारियों की मांगों में ज्यादा वेतन और बेहतर पेंशन शामिल हैं।
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में सरकारी मिडिल और हाई स्कूलों में शिक्षकों की गैरमौजूदगी के कारण 1 करोड़ 54 लाख शिक्षण घंटे प्रभावित हुए। यह कुल निर्धारित शिक्षण समय का 7.5 प्रतिशत था।
छात्र संगठन उच्च शिक्षा में 2 लाख 50 हजार अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय प्रवेश व्यवस्था के तहत होने वाली चयन प्रक्रिया को खत्म करने, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति करने और शैक्षणिक संस्थानों की मरम्मत कराने की भी मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा छात्र हर महीने छात्रवृत्ति में 200 यूरो की बढ़ोतरी और सरकारी छात्र आवासों का किराया रोकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में महंगाई, रोजगार के अवसर और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
प्रदर्शन पर प्रतिबंध से ट्रेड यूनियन नाराज
फ्रांस के प्रशासन ने लियोन, नीस और मोंपेलिए समेत कुछ शहरों में प्रदर्शनों पर रोक लगा दी थी। ट्रेड यूनियनों ने इन प्रतिबंधों का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह की रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है।
इस बीच, येलो वेस्ट मूवमेंट से जुड़े संगठनों ने 31 अक्टूबर को फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। शिक्षा, महंगाई, वेतन और पेंशन से जुड़ी मांगों को लेकर जारी आंदोलन के कारण फ्रांस में आने वाले दिनों में भी विरोध प्रदर्शन होने की संभावना बनी हुई है।
