October 3, 2026

अमेरिका में महिला कैदी को मौत की दवा के दो इंजेक्शन दिए, फिर भी नहीं हुई मौत; टेनेसी में बाकी फांसी पर रोक

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नई दिल्ली: अमेरिका के टेनेसी में मौत की सजा पाए महिला कैदी क्रिस्टा गेल पाइक को जानलेवा दवा के दो इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई। इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चलती रही और वह सांस लेती हुई खर्राटे ले रही थीं। घटना के बाद टेनेसी में इस साल निर्धारित बाकी सभी मौत की सजाओं को फिलहाल रोक दिया गया है। राज्य के गवर्नर ने मौत की सजा देने के लिए इस्तेमाल की गई पूरी प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन के अनुसार अधिकारियों ने अदालत से मंजूर प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी।

पाइक को बुधवार को स्ट्रेचर पर बांधकर मौत का इंजेक्शन दिया गया। उनके वकीलों के अनुसार अधिकारियों ने उन्हें पेंटोबार्बिटल के दो इंजेक्शन दिए, लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। प्रक्रिया के दौरान कुछ समय के लिए उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और गवाहों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद उनके वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपात याचिका दायर कर प्रक्रिया को रोकने की मांग की। मामला सामने आने के बाद राज्य में मौत की सजा की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों को लेकर जांच शुरू की गई है।

मौजूदा नियमों के अनुसार पहले इंजेक्शन के बाद कैदी की मौत नहीं होने पर दूसरा इंजेक्शन देने का प्रावधान है। हालांकि, दोनों इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी कैदी के जीवित रहने की स्थिति में आगे क्या किया जाना चाहिए, इसे लेकर नियम स्पष्ट नहीं हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नस में घातक दवा पहुंचाने में परेशानी के कारण मौत की सजा पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, पाइक के मामले में उनके वकीलों का दावा है कि दवा शरीर में पहुंचने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।

क्रिस्टा गेल पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या का दोषी ठहराया गया था और 1996 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। अदालत में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार पाइक, उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक अन्य दोस्त ने कोलीन स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी कैंपस के पास जंगल में बुलाया था। वहां स्लेमर पर हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। अपराध के समय पाइक 18 वर्ष की थीं, जबकि शिप 17 वर्ष के थे। नाबालिग होने के कारण शिप को मौत की सजा नहीं दी गई और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली।

घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने मौत के इंजेक्शन की पूरी प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, इस साल राज्य में निर्धारित बाकी सभी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। अधिकारियों के सामने अब यह जांच का विषय है कि अदालत से मंजूर प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किए जाने के बावजूद पाइक की मौत क्यों नहीं हुई। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा है कि निर्धारित प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किया गया था, लेकिन इसके बावजूद मौत की सजा पूरी नहीं हो सकी। जांच के दौरान इसी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।

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