डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए संक्रमित व्यक्ति की शीघ्र पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और समुदाय स्तर पर जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आकलन के अनुसार जुलाई के अंत तक इबोला संक्रमण के मामलों की संख्या 3,600 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि लगभग 1,600 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर भी काफी अधिक बनी हुई है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है। संगठन का कहना है कि कई क्षेत्रों में संक्रमण की नई कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रकोप पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कांगो का उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यह इलाका लंबे समय से संघर्ष, विस्थापन और मानवीय संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ पानी और पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की कमी संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही है। पड़ोसी देशों की सीमाओं से लोगों की आवाजाही भी स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान प्रकोप ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच कांगो में फैली पिछली बड़ी इबोला महामारी के मामलों का आंकड़ा भी पीछे छोड़ दिया है। अब यह पश्चिम अफ्रीका में वर्ष 2014 से 2016 के बीच फैली ऐतिहासिक महामारी के बाद दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी के रूप में दर्ज हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो संक्रमण का दायरा और बढ़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच, उपचार सुविधाओं के विस्तार और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, संक्रमित मरीजों का पृथक्करण और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन ही इस महामारी के प्रभाव को सीमित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की नजर अब कांगो की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि यह प्रकोप केवल एक देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है।
