March 8, 2026

चीन-पाक: बलूच संगठन को आतंकी घोषित करने की कोशिश नाकाम

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संयुक्त राष्ट्र: अमरीका के वीटो का ब्रिटेन, फ्रांस ने भी किया समर्थन

इस्लामाबाद. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र के 1267 प्रतिबंध समिति के तहत आतंकवादी समूहों की सूची में शामिल करने के पाक-चीन के संयुक्त प्रयासों को अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने रोक दिया है। तीनों देशों ने प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगाई है। इन्होंने पाया कि बीएलए और मजीद ब्रिगेड के अल-कायदा और आइएसआइएस से संबंध साबित करने वाले पर्याप्त सबूत नहीं थे।

यूएनएससी में अमरीका ने तर्क दिया है कि संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची केवल अल-कायदा और आइएसआइएस से जुड़े समूहों के लिए है। बीएलए और मजीद ब्रिगेड इन संगठनों से नहीं जुड़े हैं। ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अमरीका के रुख का समर्थन किया है। रूस ने इस मुद्दे पर कोई रुख नहीं अपनाया है। अब ६ माह तक यह प्रस्ताव यूएनएससी में वापस नहीं आ सकेगा। गौरतलब है कि बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय बीएलए लंबे समय से पाक आर्मी और चीनी प्रोजेक्ट को निशाना बना रहा है।

चीन के हथकंडे से पाकिस्तान को मात

तकनीकी रोक। यह वही हथकंडा है जिसका इस्तेमाल चीन अक्सर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाक स्थित आतंकवादी समूहों से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने के भारत-अमरीकी प्रयासों को रोकने लिए करता रहा है। इसी कारण साजिद मीर, शाहिद महमूद और तल्हा सईद सहित लश्कर के तीन नेता अब तक यूएन के 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध नहीं हैं।

भारत से घटते तनाव के बीच उठाया कदम

अमरीका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत के साथ राजनीतिक तनाव कम हो रहा है और भारत-अमरीका व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से पटरी पर आ रही है। अमरीका का मौजूदा फैसला, पिछले महीने वाशिंगटन के उस कदम से उलट है जब उसने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकवादी संगठनों की अपनी सूची में शामिल किया था। इसी से उत्साहित पाक ने यूएन में यह प्रस्ताव पेश किया था।

गाजा में युद्ध विराम प्रस्ताव पर अमरीका का छठी बार वीटो
न्यूयॉर्क. अमरीका ने गाजा में तत्काल और स्थायी संघर्ष विराम तथा बंधकों की रिहाई के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर फिर वीटो का इस्तेमाल किया है। सुरक्षा परिषद के अन्य सभी 14 सदस्यों ने मानवीय सहायता पहुंचाने पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था। यह छठा अमरीकी वीटो है।

मध्यपूर्व में अमरीका की उपविशेष दूत मॉर्गन ऑर्टागस ने वाशिंगटन के वीटो का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव हमास की निंदा करने या इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देने में विफल रहा है। यह हमास को लाभ पहुंचाने वाले झूठे नैरेटिव को गलत तरीके से वैध ठहराता है जिन्हें दुर्भाग्य से इस परिषद से सहायता मिलती है। इस वीटो की फिलिस्तीनी और अरब प्रतिनिधियों ने भी तीखी आलोचना की है।

 

 
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