परमाणु रेस के बीच चीन ने बढ़ाई मिसाइल पावर, सैटेलाइट से खुलासा
– चीन का अब तक सबसे ताकतवर युद्धपोत लॉन्च

चीन ने अपनी सबसे उन्नत विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल कर लिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद इस युद्धपोत का निरीक्षण किया। फुजियान चीन का तीसरा और अब तक का सबसे उन्नत विमानवाहक पोत है। यह पूरी तरह घरेलू तकनीक से बना है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम लगा है, जो फाइटर जेट को तेज गति से लॉन्च करने में सक्षम बनाता है। अब तक अमरीका ही इस तकनीक का इस्तेमाल करता था। इस पोत से तीन तरह के फाइटर जेट लॉन्च किए जा सकते हैं।
बीजिंग/वाशिंगटन. दुनिया में परमाणु हथियार के परीक्षणों की नई रेस के बीच चीन ने अपने मिसाइल साम्राज्य का विस्तार तेज कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों, नक्शों और सरकारी सूचनाओं के विश्लेषण से सामने आया है कि चीन ने 2020 के बाद से मिसाइल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। एक अमरीकी न्यूज एजेंसी की पड़ताल के मुताबिक, 136 में से 60त्न से अधिक मिसाइल निर्माण से जुड़े ठिकानों में विस्तार के संकेत हैं।
इन फैक्ट्रियों और अनुसंधान केंद्रों में 2020 से 2025 के बीच लगभग 2 करोड़ वर्गफुट से अधिक नई इमारतें बनाई गई हैं। बंकरों और टावरों के साथ कई जगहों पर मिसाइल के हिस्से भी सैटेलाइट से दिखाई दे रहे हैं। पैसिफिक फोरम के वरिष्ठ शोधकर्ता विलियम अलबर्के ने कहा, ’हथियारों की नई रेस में चीन दौड़ना शुरू कर चुका है।’ 99 मिसाइल निर्माण स्थलों की पहचान की गई है, जिनमें से 65 का दायरा तेजी से बढ़ा है।
भारत-अमरीका के लिए बढ़ी चिंता
चीन की रॉकेट फोर्स परमाणु और बलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को संभालती है। चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताएं भारत और अमरीका के लिए चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी अपनी परमाणु क्षमता के आकलन का काम दोबारा शुरू कर देना चाहिए। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि परमाणु टेस्ट शुरू किए जाएंगे।
चीन की रफ्तार बढ़ी, अमरीका पीछे
अमरीकी रक्षा विभाग के मुताबिक, चीन ने 2020 से 2024 के बीच अपनी मिसाइल आपूर्ति में 50त्न की वृद्धि की है। वहीं, अमरीका को उन्नत हथियारों की आपूर्ति में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन-इजरायल को मदद देने के चलते अमरीकी मिसाइल भंडार घटा है।
