भारत दौरे पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने संरक्षणवाद पर जताई चिंता, अमेरिका और चीन की व्यापार रणनीतियों पर साधा निशाना
नई दिल्ली । भारत दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति और चीन की आर्थिक रणनीतियों को लेकर परोक्ष रूप से तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने बिना किसी देश या नेता का नाम लिए कहा कि व्यापार में मनमाने प्रतिबंध, अचानक लगाए जाने वाले टैरिफ और बाजारों को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित करने की कोशिशें वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
डी वेवर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से जुड़ी उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान बोल रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने संरक्षणवाद और अप्रत्याशित व्यापारिक फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसे फैसलों का चलन बढ़ रहा है, जिनमें किसी देश की व्यापार नीति अचानक बदल जाती है। उन्होंने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला बताया।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ लोग एक दिन व्यापार संबंधी फैसला लेते हैं और कुछ समय बाद उसी फैसले को वापस ले लेते हैं, फिर उसे दोबारा लागू कर देते हैं। उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी और तालियां भी सुनाई दीं। इसके बाद डी वेवर ने संकेत दिया कि उपस्थित लोग समझ रहे हैं कि उनका इशारा किस दिशा में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि, उनके बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया। ट्रंप प्रशासन की ओर से अलग-अलग देशों और व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क लगाने तथा व्यापारिक नीतियों में बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है।
डी वेवर ने केवल अमेरिकी व्यापार नीति तक अपनी टिप्पणी सीमित नहीं रखी। उन्होंने चीन की आर्थिक गतिविधियों और बाजारों को प्रभावित करने वाली रणनीतियों की ओर भी संकेत किया। उनका कहना था कि कुछ देश जानबूझकर और व्यवस्थित तरीके से बाजारों में ऐसी परिस्थितियां पैदा करते हैं, जिससे उनके व्यापारिक साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के अनुसार, इस तरह की रणनीतियों का उद्देश्य दूसरे देशों को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उनकी निर्भरता बढ़ाना हो सकता है। उन्होंने संरक्षणवाद और अनुचित प्रतिस्पर्धा को ऐसी दो प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और देशों के बीच राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
उनकी टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत यूरोपीय बाजारों के साथ व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि यूरोपीय संघ भी भारत के साथ आर्थिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है।
ऐसे माहौल में बेल्जियम के प्रधानमंत्री का संरक्षणवाद के खिलाफ बयान भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर विभिन्न देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में स्थिर और पूर्वानुमान योग्य व्यापार नीति की जरूरत लगातार रेखांकित की जा रही है।
डी वेवर ने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि व्यापारिक साझेदारों के बीच भरोसा तभी मजबूत हो सकता है, जब नीतियों में स्थिरता और आर्थिक तर्क को प्राथमिकता मिले। उनके बयान में अमेरिका और चीन दोनों की ओर संकेत था, लेकिन उन्होंने किसी देश का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।
भारत यात्रा के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी वैश्विक व्यापार व्यवस्था में चल रहे बदलावों और बढ़ते संरक्षणवाद के बीच सामने आई है। उनका जोर इस बात पर रहा कि मनमाने व्यापारिक फैसलों और अनुचित प्रतिस्पर्धा से केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि इसका असर देशों के बीच संबंधों और व्यापक भू-राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
