August 24, 2026

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में ईरान को शामिल होने का आधिकारिक प्रस्ताव मिला है।

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नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में मुस्लिम देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मक्का एग्रीमेंट में ईरान को शामिल करने की संभावना ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। तेहरान को इस समझौते में शामिल होने के लिए आधिकारिक न्योता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि ईरान ने अभी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और बताया जा रहा है कि इस पर विचार किया जा रहा है।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौते का प्रमुख प्रावधान यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे सभी संबंधित देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान के संभावित जुड़ाव से इस व्यवस्था का दायरा और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ सकते हैं।

ईरानी मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, ईरान को मक्का एग्रीमेंट में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। ईरानी संसद से जुड़ी समाचार एजेंसी के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से बताया गया कि तेहरान के सामने रखे गए प्रस्ताव पर फिलहाल विचार-विमर्श चल रहा है। अभी तक ईरानी पक्ष की ओर से समझौते में शामिल होने को लेकर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तेहरान दौरे को लेकर भी क्षेत्रीय स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका ईरान दौरा क्षेत्र में शांति स्थापित करने और मौजूदा तनाव को कम करने की कोशिशों से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे समय में यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

मक्का समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के समझौते में शामिल होने का स्वागत करते हुए इसे साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर उनके दावों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

ईरान के संभावित जुड़ाव का असर केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। यदि तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरणों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ ईरान का एक साझा रक्षा ढांचे में आना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।

वहीं बांग्लादेश ने भी इस घटनाक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश के नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने समझौते को लेकर बयान दिया है। साथ ही बांग्लादेशी पक्ष ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बातचीत के माध्यम से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में मक्का एग्रीमेंट अब केवल तीन देशों के बीच रक्षा सहयोग का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम एशिया और मुस्लिम देशों की व्यापक रणनीतिक राजनीति से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।

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