America/USA: दरवाजे पर खड़ा शटडाउन, क्या ट्रंप इसे रोक पाएंगे?

अमरीका फिर सरकारी शटडाउन की कगार पर खड़ा है। अगर 30 सितंबर की मध्यरात्रि तक संसद फंडिंग पर सहमत नहीं होती, तो सरकार के बड़े हिस्से का कामकाज बंद हो जाएगा। लाखों कर्मचारियों की तनख्वाह रुक जाएगी। मामला केवल बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है:
कारण: शटडाउन की स्थिति का क्या है?
अमरीकी सरकार का वित्तीय वर्ष 1 अक्टूबर से शुरू होता है। उससे पहले तक बजट पारित होना जरूरी है। रिपब्लिकन-नियंत्रित प्रतिनिधि सभा ने एक फंडिंग बिल पास किया, लेकिन सीनेट में डेमोक्रेट्स ने उसे खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने डेमोक्रेट नेताओं से बातचीत रद्द कर दी और उनकी मांगों को गंभीर नहीं बताया। अब ट्रंप इन नेताओं से बात कर सकते हैं।
मुख्य विवाद क्या हैं? : डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली सब्सिडी जारी रहे। मेडिकेड कटौती वापस ली जाए। पब्लिक मीडिया के लिए फंडिंग बहाल की जाए। रिपब्लिकन इन मांगों को अस्वीकार कर चुके हैं और कहते हैं कि यह शटडाउन रोकने की प्रक्रिया से जुड़ा नहीं हैं। सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने इन्हें अनुचित और असंगत करार दिया।
आम जनता पर असर?
: लाखों सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के काम करेंगे या घर भेज दिए जाएंगे।
: जरूरी सेवाएं जैसे सामाजिक सुरक्षा, सेना, इमिग्रेशन और हवाई यातायात चालू रहेंगी, लेकिन स्टाफ कम होगा।
: नेशनल पार्क, म्यूज़यिम और अन्य जगहें बंद हो सकती हैं।
: खाद्य सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन सुनवाई में देरी होगी। इससे प्रवासियों को समस्या होगी।
आर्थिक असर क्या होगा?… 2018 में हुए 34 दिन लंबे शटडाउन से पता चला था कि इसका असर बड़ा होता है। अगर यह इस बार भी लंबा चला तो आर्थिक विकास धीमा होगा। बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और सरकार पर जनता का भरोसा हिल सकता है। यह केवल बजट की लड़ाई नहीं, बल्कि अमरीका की राजनीतिक दिशा और आम जनता की जिंदगी पर गहरा असर डालने वाला संकट है।
