मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका-इजरायल! परमाणु ठिकाने और मिसाइल भंडार निशाने पर
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सैन्य अभियान छोटा, लेकिन बेहद तीव्र हो सकता है। अमेरिका और इजरायल की योजना कथित तौर पर तीन दिनों तक हमले कर ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और उसे परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए मजबूर करने की है। संभावित लक्ष्यों में परमाणु ठिकानों के अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांड सेंटर भी शामिल हैं।
पिकैक्स माउंटेन पर हमले की भी चर्चा
ईरान के पहाड़ों के नीचे स्थित परमाणु केंद्र ‘पिकैक्स माउंटेन’ भी संभावित निशाने पर हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस ठिकाने के खिलाफ 22,000 पाउंड वजनी GBU-43/B बम के इस्तेमाल पर विचार करने की बात कही थी। इसे MOAB यानी ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ भी कहा जाता है।
हालांकि, ऊर्जा ढांचे पर हमले को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति बताई जा रही है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार प्रभावित हो सकता है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसी वजह से ऊर्जा प्रतिष्ठानों को संभावित लक्ष्यों में शामिल करने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
ईरान की चेतावनी- जवाब सीमित नहीं रहेगा
दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि उस पर नया हमला हुआ तो उसकी जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। तेहरान ने संकेत दिया है कि संभावित जवाबी हमलों में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, डेटा सेंटरों और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
ईरानी अधिकारियों के रुख से संकेत मिलता है कि किसी नए संघर्ष की स्थिति में युद्ध को सीमित रखना आसान नहीं होगा। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने और संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने की आशंका भी गहरा सकती है।
ईरान की सीमा के पास इजरायल का बड़ा हवाई अभ्यास
इस बीच, इजरायल ने सोमवार को ईरान की सीमा के नजदीक एक बड़ा वायुसेना अभ्यास किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली वायुसेना के दर्जनों लड़ाकू और हवा में ईंधन भरने वाले विमान इजरायल से 800 मील से अधिक दूर तक गए। विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए ईरान की सीमा के पास उड़ान भरी और फिर लौट आए।
अधिकारियों के अनुसार, विमानों का यह मार्ग ईरान पर संभावित हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले रास्ते जैसा था। हालांकि, इजरायल ने इसे प्रशिक्षण अभ्यास बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को कड़ा संदेश देना था। इजरायल ने इस अभियान की जानकारी अमेरिका को पहले ही दे दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरान ने अभ्यास में शामिल इजरायली विमानों पर हमला किया तो इजरायल को बड़े सैन्य अभियान का बहाना मिल सकता है। इससे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती थीं।
ट्रंप के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
पिछले अनुभवों को देखते हुए ट्रंप फिलहाल ईरान पर नए हमले का आदेश देने से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि, जब तक ईरान परमाणु वार्ता की मेज पर लौटकर समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता, तब तक सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी रह सकती है।
अमेरिका के सामने नई जंग शुरू करने के रास्ते में तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, हमले की स्थिति में तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा। दूसरी, संघर्ष का पूरे मिडिल ईस्ट में फैल जाना। तीसरी, अमेरिकी सेना के पास मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर की संभावित कमी।
ऐसे में सैन्य योजनाएं तैयार होने की खबरों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन हमले को मंजूरी देगा या कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देगा। फिलहाल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच पूरे क्षेत्र की निगाहें वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं।
