October 28, 2026

नेपोटिज्म की बहस पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी, परिवार की पहचान मिली लेकिन मुश्किलें भी खुद झेलीं

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नई दिल्ली। बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को अक्सर इस सवाल का सामना करना पड़ता है कि क्या उन्हें अपने पारिवारिक संबंधों की वजह से फिल्मों में आसानी से मौके मिल जाते हैं। अब अभिनेत्री सारा अली खान ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा ने माना कि फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें कई फायदे मिले हैं लेकिन उन्होंने अपने करियर में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके बयान के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में अवसरों और संघर्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में सारा अली खान ने कहा कि फिल्मी विरासत के अपने फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। उनके मुताबिक परिवार की पहचान होने से उन्हें अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले ही पहचान और अवसर मिलने लगे थे। किसी बड़े फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकार के लिए शुरुआत में कुछ दरवाजे आसानी से खुल सकते हैं। सारा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उन्हें भी इसका फायदा मिला और उन्हें फिल्मों में डेब्यू करने का अवसर मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ दर्शकों और इंडस्ट्री की उम्मीदें भी काफी बढ़ जाती हैं।

सारा ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने भी अपना परिवार खुद नहीं चुना। उनका जन्म जिस परिवार में हुआ वह उनकी पसंद नहीं बल्कि किस्मत का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्मी परिवार से आने के कारण मिलने वाले अवसरों को स्वीकार करने के साथ कलाकारों की मेहनत को भी देखा जाना चाहिए। सारा के अनुसार किसी कलाकार की पारिवारिक पृष्ठभूमि उसके करियर का एक हिस्सा हो सकती है लेकिन लंबे समय तक काम करने के लिए अपनी प्रतिभा और मेहनत भी दिखानी पड़ती है।

अभिनेत्री ने इंडस्ट्री में करीब आठ साल बिताने के बाद अपने विशेषाधिकार को लेकर बार बार सफाई देने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि वह अपने पारिवारिक बैकग्राउंड के फायदे को समझती हैं और उसे छिपाने की कोशिश नहीं करतीं। लेकिन उनके मुताबिक किसी कलाकार के काम और उसके सफर को केवल परिवार के नाम तक सीमित करके देखना भी सही नहीं है। सारा की बातों से यह स्पष्ट हुआ कि वह नेपोटिज्म की बहस में अपने फायदे स्वीकार करने के साथ अपनी व्यक्तिगत यात्रा को भी सामने रखना चाहती हैं।

अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए सारा ने कहा कि वह अपनी मां के साथ रहीं और उनके पिता ऐसे व्यक्ति नहीं थे जो उनके लिए काम दिलाने के लिए फिल्म निर्माताओं के कार्यालयों के चक्कर लगाते या लोगों से उन्हें अपनी फिल्मों में लेने की गुजारिश करते। उन्होंने फिल्म केदारनाथ के दौरान आई मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्हें कई चीजें खुद संभालनी पड़ीं। सारा ने यह भी कहा कि उन्हें इंडस्ट्री में कोई ऐसा गॉडफादर नहीं मिला जो हर परिस्थिति में उनके लिए रास्ता आसान कर देता।

सारा अली खान ने साल 2018 में फिल्म केदारनाथ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह कई फिल्मों में नजर आईं और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती रहीं। हाल के वर्षों में वह अलग अलग तरह की भूमिकाओं में दिखाई दी हैं। उनकी फिल्मों को दर्शकों से कभी अच्छी तो कभी मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है।

सारा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में स्टार किड्स को मिलने वाले अवसरों और बाहरी प्रतिभाओं के संघर्ष पर बहस जारी है। उनके विचारों में एक तरफ पारिवारिक विरासत से मिले फायदे स्वीकार करने की बात है तो दूसरी तरफ अपने काम और मेहनत को भी महत्व देने की अपील है। इस बयान से यह बहस फिर सामने आई है कि फिल्मी परिवार से जुड़ाव शुरुआती अवसर दिला सकता है लेकिन करियर में आगे बढ़ने के लिए कलाकार को अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती है।

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