राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा
यह कहानी जुड़ी है ओम पुरी से जिनका शुरुआती फिल्मी सफर काफी संघर्षों से भरा रहा। ओम पुरी जब इंडस्ट्री में आए तो उन्हें अपने लुक्स और साधारण पृष्ठभूमि के कारण कई तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उस दौर में शबाना आजमी ने भी उनके लुक्स को लेकर हल्का सा कमेंट किया था जिससे उन्हें यह अहसास हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री में स्वीकार किए जाना आसान नहीं होता।
इसी माहौल में ओम पुरी के मन में यह डर भी बैठ गया था कि जब वे राज कुमार जैसे सख्त और बेबाक अभिनेता के साथ काम करेंगे तो शायद उन्हें भी किसी तरह की तीखी टिप्पणी सुननी पड़ सकती है। इस डर की वजह से उन्होंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर शूटिंग के दौरान कुछ अपमानजनक हुआ तो वह फिल्म बीच में ही छोड़ देंगे।
लेकिन वास्तविकता उनके डर से बिल्कुल अलग साबित हुई। ओम पुरी की एक्स वाइफ सीमा कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया कि इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई बार उनके सीनियर्स द्वारा टारगेट किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश भी होती थी। लेकिन ओम पुरी ने अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी भी किसी जूनियर के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया।
सीमा कपूर के अनुसार जब ओम पुरी ने राज कुमार के साथ काम किया तो एक अलग ही स्थिति देखने को मिली। राज कुमार की पर्सनैलिटी और उनके अभिनय का स्तर इतना मजबूत था कि वह सामने वाले को अपने आप सम्मान देने पर मजबूर कर देता था। ओम पुरी को पूरा डर था कि शायद उनके साथ भी कुछ अपमानजनक व्यवहार होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
बताया जाता है कि राज कुमार ने ओम पुरी के साथ किसी तरह की बेइज्जती या तंज जैसी बात नहीं की। इसका कारण यह माना जाता है कि ओम पुरी का अभिनय और उनका गंभीर रवैया इतना प्रभावशाली था कि राज कुमार ने उनके प्रति एक अलग सम्मान बनाए रखा। यह वही दौर था जब ओम पुरी अपने काम को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और उनकी एक्टिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रही थी।
सीमा कपूर ने यह भी बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई तरह की मानसिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता था लेकिन टैलेंट और आत्मविश्वास धीरे धीरे उन्हें मजबूत बनाता था। ओम पुरी ने भी इसी संघर्ष से सीखकर अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया।
यह किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर की झलक दिखाता है जब पर्सनैलिटी और टैलेंट दोनों ही किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होते थे।
