नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड
नई दिल्ली: नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई कलाकारों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तारडे ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो लोग नाना पाटेकर को अपना दोस्त मानते थे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार में जरूर पहुंचना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्मी सितारों के नहीं आने से नाना पाटेकर की महानता कम नहीं होती। उनके मुताबिक, अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों का शामिल होना इस बात का प्रमाण था कि अभिनेता का जुड़ाव केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं था।
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत में शोक की लहर फैल गई। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके पैतृक गांव डोणजे में उनके फार्महाउस पर किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और मनोरंजन जगत की कुछ हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, बॉलीवुड के कई चर्चित कलाकारों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।
प्रवीण तारडे ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नाना पाटेकर का कद किसी फिल्म उद्योग या सितारों की उपस्थिति से तय नहीं होता। उन्होंने अंतिम संस्कार में पहुंचे किसानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से किसान नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने किसानों के पसीने और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए किसानों का सम्मान फिल्मी दुनिया के बड़े नामों से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाना के ग्रामीण जीवन और किसानों के साथ उनके संबंधों को उनकी पहचान का अहम हिस्सा बताया।
तारडे ने कहा कि नाना पाटेकर ने खुद को केवल बॉलीवुड के अभिनेता के रूप में पेश नहीं किया। वह अपनी पहचान किसान के रूप में भी बताते थे। इसी वजह से उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी को तारडे ने खास महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नाना का लोगों से जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान उनकी वास्तविक विरासत को दर्शाता है। उनके मुताबिक, अभिनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि अंतिम संस्कार में कितने फिल्मी सितारे पहुंचे।
हालांकि, प्रवीण तारडे ने बॉलीवुड के कुछ लोगों की गैरमौजूदगी पर शिकायत भी जताई। उन्होंने कहा कि कम से कम उन लोगों को जरूर आना चाहिए था, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे। उन्होंने जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर का उल्लेख करते हुए बताया कि ये दोनों नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने मुंबई में किसी कम चर्चित कलाकार के निधन पर लोगों के बड़ी संख्या में पहुंचने और नाना के अंतिम संस्कार में सीमित बॉलीवुड मौजूदगी के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए।
नाना पाटेकर का अभिनय करियर हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। फिल्मों के अलावा वह किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी मौजूदगी ने उनके इस जुड़ाव को फिर चर्चा में ला दिया। प्रवीण तारडे की नाराजगी के बावजूद उनका कहना था कि बॉलीवुड के सितारों की गैरमौजूदगी से नाना का सम्मान कम नहीं होता। उनके लिए अभिनेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे किसान ही उनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ उनके गहरे संबंधों की महत्वपूर्ण तस्वीर थे।
