April 23, 2026

सरहदों से परे संगीत आशा भोसले और अदनान सामी का अनोखा संगम जिसने रच दिया इतिहास

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नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले ने अपनी मधुर आवाज से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में पहचान बनाई थी लेकिन उनकी कला का विस्तार सरहदों से कहीं आगे तक फैला हुआ था कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी अपनी आवाज दी थी और वहां भी अपने सुरों का जादू बिखेरा था

साल 1995 में रिलीज हुई पाकिस्तानी उर्दू म्यूजिकल फिल्म सरगम इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है इस फिल्म का निर्देशन सयेद नूर ने किया था और इसमें मुख्य भूमिका निभाई थी मशहूर गायक अदनान सामी और अभिनेत्री ज़ेबा बख्तियार ने खास बात यह रही कि इस फिल्म से अदनान सामी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी जबकि ज़ेबा पहले ही भारतीय दर्शकों के बीच फिल्म हिना से लोकप्रिय हो चुकी थीं

इस फिल्म में कुल ग्यारह गाने शामिल थे जिनमें से दो गानों को अपनी आवाज दी थी आशा भोसले ने ये गाने थे क्या है ये उलझन और जरा ढोलकी बजाओ गोरियों ये दोनों गीत उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए थे और आज भी संगीत प्रेमियों के बीच सुकून देने वाले गीतों के रूप में सुने जाते हैं खास बात यह भी थी कि इन गानों को फिल्म के हीरो अदनान सामी ने ही कंपोज किया था इस तरह यह फिल्म संगीत और अभिनय दोनों ही स्तर पर एक खास सहयोग का उदाहरण बन गई

फिल्म की कहानी जितनी दिलचस्प थी उतनी ही रोचक इसकी कास्ट की असल जिंदगी भी थी बहुत कम लोगों को पता है कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही यानी 1993 में अदनान सामी और ज़ेबा बख्तियार ने शादी कर ली थी दोनों की यह जोड़ी पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी साथ थी हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और 1997 में दोनों अलग हो गए

आशा भोसले का करियर अपने आप में एक मिसाल रहा उन्होंने करीब आठ दशकों तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहकर हजारों गाने गाए उन्होंने अलग अलग भाषाओं में अपनी आवाज दी और हर शैली में खुद को साबित किया अपनी बहन लता मंगेशकर से अलग पहचान बनाने के लिए उन्होंने अपनी गायकी में विविधता और प्रयोग को अपनाया यही कारण रहा कि उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ

आज भले ही आशा भोसले हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज और उनके गीत हमेशा जीवित रहेंगे पाकिस्तान की फिल्म सरगम में गाए उनके गीत इस बात का प्रमाण हैं कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती यह दिलों को जोड़ता है और सरहदों को पार कर जाता है

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