साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी
जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला।
करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा।
पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।
