रामायण ट्रेलर पर कॉस्ट्यूम विवाद तेज, सुरभि दास बोलीं ब्लाउज पहनाते तब भी सवाल होते और नहीं पहनाते तब भी
सुरभि दास ने कहा कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के साथ अलग अलग तरह की राय सामने आना स्वाभाविक है और हर व्यक्ति को संतुष्ट करना संभव नहीं होता। उनके अनुसार दर्शकों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी फिल्म का इंतजार करना चाहिए क्योंकि ट्रेलर के कुछ दृश्यों के आधार पर पूरी फिल्म का आकलन करना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म में सीता और कैकेयी के कॉस्ट्यूम आधुनिक शैली के दिखाई दे रहे हैं और वे त्रेता युग की पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाते। इसी आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरभि दास ने कहा कि अगर किरदारों को ब्लाउज नहीं पहनाया जाता तो भी लोग सवाल उठाते और अब जब पहनाया गया है तब भी आपत्ति जताई जा रही है। उनके मुताबिक लोगों की अलग अलग सोच होती है और हर किसी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना संभव नहीं है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि रामायण बेहद बड़े स्तर पर बनाई जा रही फिल्म है और इसकी कहानी, अभिनय तथा प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली होगी कि दर्शकों का ध्यान केवल कॉस्ट्यूम जैसी छोटी बातों पर नहीं रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सिनेमाघरों में फिल्म देखने के बाद दर्शकों की राय अधिक संतुलित होगी।
सुरभि दास ने यह भी याद दिलाया कि रामायण पर पहले भी कई फिल्में और धारावाहिक बन चुके हैं और हर बार किसी न किसी पहलू को लेकर चर्चा या आलोचना हुई है। ऐसे में किसी भी नई प्रस्तुति को लेकर मतभेद होना असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को फिल्म की पूरी कहानी देखने के बाद ही उसके बारे में राय बनानी चाहिए।
इससे पहले फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइनर रिम्पल और हरप्रीत नरूला भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उनका कहना था कि कॉस्ट्यूम तैयार करते समय कहानी, पात्रों और फिल्म की समग्र दृश्य शैली को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने भी दर्शकों से अपील की थी कि वे ट्रेलर के सीमित दृश्यों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी फिल्म देखने के बाद अपनी राय रखें।
रामायण का ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही फिल्म को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है। जहां एक ओर इसकी भव्यता और स्टारकास्ट चर्चा का विषय बनी हुई है वहीं कॉस्ट्यूम विवाद ने भी इसे सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की नजर फिल्म की रिलीज पर टिकी है क्योंकि तभी यह साफ होगा कि मेकर्स की रचनात्मक सोच और प्रस्तुति दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।
