यदि रात्रि में जरा देर के लिए बिजली गुल हो जाए तो हमारी क्या हालत होती है ? अंधकार में कोई पल भर रहना नहीं चाहता। योगी कथामृत में परमहंस योगानंद ने कहा है कि सृष्टि के अरबों – खरबों रहस्यों में सबसे विलक्षण रहस्य है – प्रकाश। प्रकाश हो, और प्रकाश हो गया ‘ सृष्टि की रचना में ईश्वर के प्रथम आदेश से सृष्टि का आधार तत्व प्रकाश अस्तित्व में आ गया। इस अलौकिक माध्यम की किरणों पर ही ईश्वर की सारी अभिव्यक्तियां मूर्त होती हैं, प्रत्येक युग के संतों ने अग्नि शिखा और प्रकाश के रुप में ईश्वर के प्रकट होने की बात कही है।
गुरुनानक साहब कहते हैं – अव्वल अल्लाह नूर उपाया अर्थात कुदरत ने सबसे पहले इस संसार में नूर ही उपजाया था। सिख पंथ में गुरुनानक देव की जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में तमसो मा ज्योतिर्गमय का विराट संदेश है। यहां भी ईश्वर को प्रकाश रूप में ही देखा जाता है। सेंट जाॅन कहते हैं ‘ उसकी आंखें अग्निज्वाला के ही समान थीं और उसका रुप ऐसा था मानो सूर्य अपने संपूर्ण तेज के साथ चमक रहा हो। बुद्ध और बोधिसत्व (प्रबुद्ध प्राणी) द्वारा प्रकाश का उत्सर्जन अक्सर वर्णित किया जाता है, और बुद्ध के नामों में प्रकाश को भी शामिल किया जाता है, इस्लाम में प्रकाश को ईश्वर के मार्गदर्शन और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस रोशनी का इस्तेमाल ईश्वर के मार्गदर्शन और ज्ञान के के रूप में किया जाता है।
स्वर्ग और नरक की जो परिकल्पना है उसमें भी स्वर्ग को प्रकाश से और नरक को अंधकार से जोड़ कर देखा जाता है। सनातन संस्कृति में सभी देवताओं के पाश्र्व में एक प्रकाश से भरपूर आभामंडल दृष्टव्य होता है। सूर्य का प्रकाश प्रतिदिन एक नवीन ऊर्जा का संचार करता है। हमने आत्मा को भी एक प्रकाश पुंज का स्वरूप माना है जिससे हम आलोकित रहते हैं। उसके जाते ही जीवन निस्तेज हो जाता है। किसी का मुखमंडल ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होता है। इस तरह सारी सृष्टि प्रकाश से चमत्कृत है। उसके बगैर सब बेनूर है। इसलिए उगते सूर्य को हम सभी श्रद्धा से देखते और पूजते हैं।
सूत्र यह है कि अंतस का प्रकाश, बाहृय जगत का प्रकाश सभी जगह प्रकाश की उपस्थिति , यह हमें ढेर सारे नकार और दोष दर्शन से बचाती है। इसलिए प्रकाश के आसपास रहिए, इसे ही जीवन का आधार बनाइए।
भारतीय संत परंपरा की महान विभूति गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व की आप सभी को शुभकामनाएं।।