किस्सा: फूलन देवी के कंधे पर राइफल देख जब सन्न रह गए थे अर्जुन सिंह

कांग्रेसी आज अर्जुन सिंह को याद कर रहे हैं। कुछ भाजपाई भी। मध्य प्रदेश के भाजपाई मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें राज्य की अहम हस्ती बताते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। असल में 5 नवम्बर अर्जुन सिंह की जयंती होती है। इस बार उनकी 95वीं जयंती मन रही है।
अर्जुन सिंह तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वह केंद्र सरकार में मंत्री और पंजाब के राज्यपाल भी रहे। राज्यपाल बनने कि कहानी बड़ी दिलचस्प है। यह कहानी जानेंगे।
पहले जानिए भाजपाई सीएम मोहन यादव ने अर्जुन सिंह के बारे में क्या कहा-
#WATCH | Bhopal: Madhya Pradesh CM Mohan Yadav says, "The late Arjun Singh was a key figure in Madhya Pradesh politics, serving three times as Chief Minister and as Governor of Punjab and minister in the Indian government. His supporters and the state remember him for advocating… https://t.co/AHHhtgFBEW pic.twitter.com/mSZYHAx9Xn
— ANI (@ANI) November 5, 2025
अब जानिए कैसे सीएम बनने गए थे और गवर्नर बन कर लौटे अर्जुन सिंह
अर्जुन सिंह को जब पंजाब का राज्यपाल बनाया गया तब वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे थे। यह बात 1985 की है। फरवरी का महीना था। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तीन-चौथाई बहुमत मिला था। इस जबर्दस्त जीत पर तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अर्जुन सिंह को बधाई संदेश भेजा। इससे पहले हुए लोकसभा चुनाव में भी भारी बहुमत पाकर राजीव गांधी प्रधानमंत्री बन चुके थे।
11 मार्च, 1985 को अर्जुन सिंह बाकायदा मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता चुन लिए गए। अगले दिन वह अपने मंत्रिपरिषद की लिस्ट तैयार करने के लिए राजीव गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे। सुबह 10.30 बजे का वक्त था। अर्जुन सिंह राजीव गांधी के निवास 1, सफदरजंग रोड पर थे। वह राजीव के कमरे में पहुंचे। देखा कि प्रधानमंत्री एक कुर्सी पकड़ कर खड़े हैं। दुआ-सलाम के बाद अर्जुन सिंह अपने आने का मकसद बताने ही वाले थे कि राजीव गांधी ने उनका हाथ थाम लिया और कहा- मैंने आपके लिए एक खास काम सोच कर रखा है। अर्जुन सिंह हैरान हुए। अगले ही पल राजीव गांधी ने सुना दिया- आप राज्यपाल बन कर पंजाब चले जाइए। मैंने पंजाब में शांति बहाली का वादा किया है और इसमें आप हमारी मदद कर सकते हैं।
यह फरमान सुनाते हुए राजीव गांधी ने अर्जुन सिंह से यह भी कहा- पत्नी से सलाह करनी है तो कर लीजिए। जब सिंह ने बताया कि इसकी जरूरत नहीं है तो राजीव बोले- 14 मार्च को पंजाब चले जाइए। मध्य प्रदेश के सीएम के लिए आप जिनका नाम देना चाहते हैं, दे दीजिए।
सिंह ने यह कहानी अपनी आत्मकथा A Grain of Sand in the Hourglass of Time में बताई है। इसमें उन्होंने अपने जीवन के कई प्रसंग बताए है। ऐसा ही एक प्रसंग फूलन देवी से पहली मुलाकात का है। यह मुलाकात फूलन के आत्मसमर्पण के वक्त हुई थी।
जब पहली बार हुआ फूलन देवी से सामना
अर्जुन सिंह ने जब पहली बार ‘खौफनाक’ फूलन देवी को देखा तो वह हैरान रह गए थे। छोटे कद (मुश्किल से पांच फीट) की एक महिला के कंधे पर ऑटोमैटिक राइफल लटक रही थी। वह मंच पर आईं और उनके पैर छुए। अपना हथियार जमीन पर रख दिया।
अर्जुन सिंह के मन में फूलन देवी के लिए हमदर्दी थी। वह मानते थे कि फूलन को उस पर जुल्म करके कानून हाथ में लेने के लिए मजबूर किया गया था। हालांकि, उस दिन के बाद फूलन की जिंदगी से हिंसा-प्रतिहिंसा का दौर खत्म हो गया था। बता दें कि फूलन देवी ने अर्जुन सिंह के सामने ही आत्मसमर्पण किया था। तब अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
gang would lay arms in front of pictures of Mahatma Gandhi & goddess Durga and not any government official.
All her demands were accepted and she surrendered in front of Gandhi & Durga photos in presence of Arjun Singh in February, 1983. Thousands of…..(3/4)
— Heritage Times (@HeritageTimesIN) July 25, 2021
फूलन देवी को पुलिस एक वाहन तक लेकर गई और उन्हें ग्वालियर जेल पहुंचा दिया गया। वहां उन्हें करीब आठ साल रहना था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी कभी इस बात के लिए दबाव नहीं डाला कि फूलन को उत्तर प्रदेश की किसी जेल में भेज दिया जाय।
दिसम्बर 1990 में अर्जुन सिंह नई दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में दिल के ऑपरेशन के लिए भर्ती थे। तब जेल से फूलन सिंह ने उनके लिए एक संदेश भिजवाया था। इसमें उन्होंने शुभकामना दी थी और कुछ मदद नहीं कर पाने का अफसोस जताया था।
अर्जुन सिंह के प्रति फूलन देवी का परिवार भी शुक्रगुजार रहा। एक इंटरव्यू में फूलन की बहन रुक्मिणी देवी ने कहा था कि उनकी बहन को इन्दिरा गांधी, मुलायम सिंह और अर्जुन सिंह ने बचाया था।
Super Exclusive-
फूलन देवी की बहन रुक्मणी देवी का इंटरव्यू
“फूलन को शेर सिंह राणा ने धोखे से मारा!
मर्द होता तो ललकार कर वार करता!!”
फूलन जैसी चंडी बने हर लड़की
इंदिरा गांधी, अर्जुन सिंह और मुलायम सिंह…
फूलन को इन तीनों ने बचाया!!
मुलायम सिंह पिता से बढ़कर!!” pic.twitter.com/i107Er5amr
— abhishek upadhyay (@upadhyayabhii) March 12, 2025
