October 8, 2026
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– विनोद बंसल (राष्ट्रीय प्रवक्ता – विहिप)

जहां पर बजरंग दल का जन्म हुआ और जिस प्रारम्भिक कार्य के लिए उसकी उत्पत्ति हुई, उसकी पूर्णता की एक सुखद अनुभूति लिए उसके 8 पूर्व प्रमुख गत 2 अप्रेल को अयोध्या धाम पहुंचे। वहाँ उन्होंने पूजा अर्चना के उपरांत सामूहिक रूप से श्री राम जन्म भूमि मंदिर परिसर में बने अपने आदर्श आराध्य देव बजरंगबली के मंदिर पर ध्वजा रोहण किया। यह दृश्य उन सभी महा योद्धाओं की आँखों को कृतज्ञता के आंसुओं से सजल कर देने वाला था।

बजरंगदल का इतिहास
1984 में जब विश्व हिन्दू परिषद ने अयोध्या में श्री राम-जानकी रथ यात्रा निकाली, तो तत्कालीन सरकार द्वारा उसे सुरक्षा देने से मना कर दिया गया। इस के बाद, पूज्य संतों और श्रद्धेय श्री अशोक सिंहल जी को युवाओं की एक ऐसी वाहिनी की आवश्यकता महसूस हुई जो इस राम काज को स्वयं अपने बाहुबल से सम्पन्न करा सके। यात्रा की सुरक्षा हेतु उन्होंने हिन्दू युवाओं की एक संगठित शक्ति का श्रजन किया जिसका नाम बजरंग दल रखा। बाद में विश्व हिन्दू परिषद की इस युवा इकाई को श्री राम मंदिर आंदोलन को गति देने और देश भर में हिंदू युवाओं को संगठित करने का कार्यभार सौंपा गया।

प्रारंभ में बजरंग दल की कमान तत्कालीन युवा नेता श्री विनय कटियार को सौंपी गई। उनके बाद क्रमश: सर्वश्री जयभान सिंह पवैया (ग्वालियर-मध्य प्रदेश), डॉ सुरेंद्र कुमार जैन (रोहतक-हरियाणा), श्री प्रकाश शर्मा (कानपुर-उत्तर प्रदेश), श्री सुभाष चौहान(कंधमाल-उड़ीसा), श्री राजेश पांडे (रीवा-मध्य प्रदेश), श्री मनोज वर्मा (कन्नौज-उत्तर प्रदेश), श्री सोहन सिंह (धार-मध्य प्रदेश) व श्री नीरज दोनेरिया (आगरा-उत्तर प्रदेश), इसके प्रमुख यानि राष्ट्रीय संयोजक बने। आज जब बजरंगदल 42 वर्ष का हो गया तब एक 41 वर्षीय युवा पाली-राजस्थान के श्री किशन प्रजापत के हाथों में इसकी कमान है।

यह संगठन ‘सेवा, सुरक्षा और संस्कार’ के ध्येय वाक्य पर काम करता है और देश-भर के युवाओं में राष्ट्र, धर्म, संस्कृति व संस्कारों के विकास के साथ शौर्य, सुरक्षा और स्वावलंबन की दिशा में सतत रूप से सक्रिया है। देश के किसी भी कोने में बात चाहे लव जिहाद, अवैध धर्मांतरण, गौ हत्या, जिहादी आतंकवाद या अन्य किसी प्रकार के हिन्दू आस्था पर आघातों पर प्रहार की हो या सामाजिक समरसता, धर्म-यात्राओं, तीर्थों, मठ-मंदिरों, पूज्य संतों, मातृशक्ति, गौमाता या भारत माता की सुरक्षा की, बजरंग दल सदैव कृत संकल्पित हो कर खड़ा नजर आता है।

सेवा कार्य:
प्रतिवर्ष लाखों यूनिट रक्तदान, वृक्षारोपण, मंदिरों की सफाई, तीर्थों की व्यवस्था व सुरक्षा, बीमार गायों व मानवों के लिए एम्बुलेंस सेवा, दुर्घटना, आपदा व महामारी काल में अबिलंब आपात सेवा के कार्य बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा निस्वार्थ भाव से किए जा रहे हैं। युवाओं को बलिष्ठ बनाने हेतु प्रतिदिन बलोपासना केंद्र, भगवत भक्ति के माध्यम से शक्ति और शौर्य अर्जित करने हेतु साप्ताहिक हनुमान चालीसा, तथा विद्यार्थियों में संस्कार शिक्षा जैसे अनेक कार्य उसने अपने हाथों में लिए हुए हैं। अब तक इसके द्वारा लाखों गौ माताओं को कसाइयों से तथा हजारों बहिनों को लव जिहादियों से बचाया जा चुका है। मंदिरों व संतों के अतिरिक्त देश, धर्म व संस्कृति पर होने वाले किसी भी हमले का बजरंगदल ने सदा ही प्रखरता के साथ जबाव दिया है।

अपने 42 वर्षों की विकास यात्रा में विश्व हिन्दू परिषद के इस युवा संगठन ने समाज के साथ मिलकर अनेक जन जागरण अभियान चलाए जो कालांतर में वैश्विक कीर्तिमान बन गए। 1984 में युवाओं की सहभागिता से प्रारम्भ हुए श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आन्दोलन ने देश के लाखों गाँवों के 65 करोड़ लोगों को जोडा। सड़क से संसद व सर्वोच्च न्यायालय तक अपनी आवाज बुलंद कर 496 वर्षों के संघर्ष के उपरांत, देश के स्वाभिमान का पुनरजागरण करते हुए, 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला कि प्राण प्रतिष्ठा ने इस ऐतिहासिक दिवस को स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया।

जिहादी आतंक को चुनौती:
1995 में जब आतंकियों ने बाबा अमरनाथ की यात्रा को बंद करने की धमकी देते हुए यह कहा कि यदि कोई आएगा तो वापस नहीं जाएगा। बजरंग दल के आह्वान पर 51 हजार बजरंगी व एक लाख अन्य शिव भक्तों ने जय भोले की हुंकार भरते हुए उस दुर्गम यात्रा की ओर जब कूच किया तो उस यात्रा को रोकने का कोई आज तक दुस्साहस नहीं कर पाया। पूंछ जिले के सीमांत क्षेत्र को हिन्दू विहीन करने के जिहादी षड्यंत्र को भांपते हुए बजरंग दल ने 2005 में बाबा बूढ़ा अमरनाथ की यात्रा को जब पुन: प्रारम्भ कराया तो वहां से हिन्दुओं का पलायन भी रुका और समाज व सुरक्षा कर्मियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा। इनके अलावा मेवात में नलहड़ महादेव यात्रा, कर्नाटक में दत्ता पीठ यात्रा तथा अयोध्या से जनकपुर तक जाने वाली श्री राम-जानकी बारात यात्रा भी सामाजिक समरसता व एकात्मता का भाव जागृत कर रही हैं।

श्री राम सेतु की रक्षा:
भगवान श्रीराम के आदेश पर नल व नील द्वारा दक्षिण में बनाए गए राम सेतु को तत्कालीन सरकार के हमले से बचाने हेतु भी विहिप ने एक बड़ा जन आन्दोलन खडा किया था। जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में श्री राम के अस्तित्व को ही नकार दिया तो विहिप के इस युवा विभाग ने ही मात्र चार घंटे के सफल देशव्यापी चक्का जाम ने सरकार को उसी दिन झुकने को मजबूर कर दिया। दिल्ली के स्वर्ण जयंती पार्क में उपस्थित लाखों राम भक्तों के सैलाब के आगे सरकारी जिद धरी रह गई।

बजरंग दल ने 1984 से लेकर आज तक देश-धर्म संस्कृति व राष्ट्र की रक्षार्थ सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। सेवा, सुरक्षा व संस्कार के मूल मंत्र लेकर इसने संस्कृत भाषा, वेद पाठशाला तथा संस्कारों की अभिवृद्धि हेतु भी अनेक कदम उठाए हैं।

इतने सब के बावजूद इसके समक्ष धर्मांतरण, लव जिहाद, गौ हत्या, जिहादी आतंकवाद, सामाजिक समरसता, धर्म स्थलों को सुरक्षा, संस्कृति व संस्कारों का क्षरण, विदेशी घुसपैठ व जनसंख्या असंतुलन जैसी अनेक चुनौतियाँ सामने खड़ी हैं जिनका मुकाबला करते हुए हिन्दू समाज को इनसे मुक्ति दिलानी है।

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