March 9, 2026

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का राज्यसभा सत्र उद्घाटन भाषण: संसदीय अनुशासन और राष्ट्रीय विकास पर जोर

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नई दिल्ली। राज्यसभा के 270वें सत्र के उद्घाटन अवसर पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है तथा जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और कद, राष्ट्र की आर्थिक दिशा निर्धारित करने में सांसदों की जिम्मेदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यसभा भी राष्ट्रपति के हालिया संबोधन से प्रेरित होकर, अपने मूल विधायी और विचार-विमर्श संबंधी कर्तव्यों के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देगी। उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 30 बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें केंद्रीय बजट 2026-27 और सरकार के विधायी प्रस्तावों की गहन समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियां अवकाश के दौरान मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की गहन जांच करेंगी। उन्होंने सभी सदस्यों से सार्थक योगदान देने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन की कार्यवाही का हिस्सा होंगे, जिन पर गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी। उन्होंने सदस्यों से संसदीय निगरानी सुनिश्चित करने और सूचीबद्ध कार्यसूची का प्रभावी संचालन करने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र विचारों की विविधता और जीवंत वाद-विवाद से ही फलता-फूलता है, और सदन में विचारों का सम्मानपूर्वक आदान-प्रदान और रचनात्मक चर्चा होना चाहिए।

श्री राधाकृष्णन ने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे इस सत्र को अनुशासन, मर्यादा और गरिमामय आचरण के साथ सफल बनाएं। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा, “अनुशासित और ज्ञानोदय से परिपूर्ण लोकतंत्र ही संसार की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था है।” उन्होंने सभी संसदीय दलों और सदस्यों से आग्रह किया कि वे मिलकर इस सत्र को रचनात्मक बनाएं और आत्मनिर्भर, समृद्ध तथा विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम उठाएं। उपराष्ट्रपति ने सत्र की सफलता के लिए सभी सदस्यों से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि यह सत्र संसदीय लोकतंत्र के उच्चतम मानकों का प्रतिबिंब बनकर उभरे और राष्ट्र के लिए प्रभावी निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हो।

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