उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर गुटबाजी पर जताई नाराजगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह समीक्षा बैठक कल्याण लोकसभा क्षेत्र में कई निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं को सांगठनिक जिम्मेदारियों से अलग किए जाने के बाद पनपे असंतोष की पृष्ठभूमि में बुलाई गई थी। बैठक के दौरान वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नए मनोनीत पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की जंग और नेतृत्व के मसले को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में संगठनात्मक स्थिति की गहन समीक्षा की जा रही थी, जहां आंतरिक गुटबाजी स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई।
अपने आक्रामक संबोधन में उद्धव ठाकरे ने पदाधिकारियों को स्पष्ट ताकीद दी कि राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सभी को निजी महत्वाकांक्षाओं का त्याग कर बड़े जनहित के मुद्दों के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ जब देश और राज्य में जनसमस्याओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर संघर्ष किए जा रहे हैं, तब दल के भीतर आंतरिक पदों के लिए खींचतान होना संगठन की नींव को कमजोर करता है। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने अभिजीत दीपके द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए नेताओं से राजनीतिक सक्रियता और अनुशासन की सीख लेने को कहा।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रमुख का यह कड़ा रुख केवल मौखिक चेतावनी तक सीमित नहीं रहने वाला है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेतृत्व का मानना है कि यदि इस गुटबाजी को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर धरातल पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के राजनीतिक विश्लेषक भी महाराष्ट्र के इस तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम और शिवसेना (यूबीटी) की अंदरूनी हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
इसके अतिरिक्त, हालिया खबरों में यह बात भी सामने आई है कि उद्धव ठाकरे और अभिजीत दीपके के मध्य टेलीफोन के माध्यम से सीधी बातचीत हुई थी। इस संवाद के दौरान ठाकरे ने उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति जानी और उन्हें मुंबई स्थित अपने निजी निवास मातोश्री आने का न्योता भी दिया। यद्यपि, इस मुलाकात और बातचीत के विस्तृत एजेंडे को लेकर दोनों ही खेमों की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
ठाणे और उसके समीपवर्ती इलाके ऐतिहासिक रूप से शिवसेना के सबसे मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। ऐसे में आगामी स्थानीय निकायों और अन्य चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की दरार पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उद्धव ठाकरे की यह सख्त नसीहत पार्टी के भीतर अनुशासन, एकजुटता और कैडर को पुनः सक्रिय करने का एक रणनीतिक प्रयास है। अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व की इस चेतावनी के बाद संगठन में क्या जमीनी बदलाव आते हैं।
