एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर दो बेंचों ने सुनवाई से खुद को अलग किया
बुधवार को हाईकोर्ट की एक बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इससे पहले मंगलवार को भी एक अन्य बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। बुधवार की कार्यवाही के दौरान जजों के सवाल पर NIA ने बताया कि वाजे को उस समय तक जेल से रिहा नहीं किया गया था।
बुधवार को मामला जस्टिस भारती एच. डांगरे और जस्टिस आशीष एस. चव्हाण की बेंच के सामने आया। बेंच ने बताया कि वाजे की ओर से दायर कुछ अलग कार्यवाहियों में जस्टिस डांगरे पहले ही खुद को मामले से अलग कर चुकी हैं। इसके बाद बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस आशीष एस. चव्हाण ने भी मामले की सुनवाई करने में असमर्थता जताई।
जस्टिस चव्हाण ने बताया कि वह एक अलग लेकिन संबंधित मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया कि NIA की अपील को उसके सामने सूचीबद्ध नहीं किया जाए। इस तरह बुधवार को भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे एक दिन पहले मंगलवार को जस्टिस सारंग वी. कोतवाल ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
लगातार दो बेंचों से सुनवाई नहीं होने के बाद NIA ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी के सामने मामला उठाया। NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि तीन अन्य डिवीजन बेंच भी इस मामले की सुनवाई करने की स्थिति में नहीं हो सकती हैं।
अनिल सिंह ने यह भी कहा कि अगर इस बीच सचिन वाजे को रिहा कर दिया जाता है तो इससे आगे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। इसके बाद मामले को जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंप दिया गया।
विशेष अदालत के जमानत आदेश के तुरंत बाद मंगलवार को ही NIA ने हाईकोर्ट का रुख किया था। ASG अनिल सिंह ने जस्टिस सारंग वी. कोतवाल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के सामने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि जस्टिस कोतवाल ने मामले से खुद को अलग कर लिया।
जस्टिस कोतवाल ने कहा था कि वह उन पक्षों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं करते, जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मोहते पेश हुए हैं। मनोज मोहते पहले सचिन वाजे की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद मामले को बुधवार को जस्टिस भारती एच. डांगरे की अगुवाई वाली वैकल्पिक बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया था।
सचिन वाजे को जमानत देते समय विशेष अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनका कृत्य गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धारा 15 में दी गई आतंकवादी कृत्य की परिभाषा को पूरा करता हुआ नहीं दिखता।
विशेष अदालत ने यह भी कहा था कि NIA ऐसे बयान दर्ज करने में विफल रही, जिनसे यह साबित हो सके कि मुंबई स्थित घर के बाहर विस्फोटकों से भरी SUV मिलने के बाद अंबानी परिवार आतंकित हुआ था।
यह मामला 25 फरवरी 2021 का है। उस दिन दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास खड़ी एक कार में धमकी भरा नोट मिला था। मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की भूमिका सामने आई और उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
अब विशेष अदालत से मिली जमानत को चुनौती देने वाली NIA की अपील की सुनवाई नए सिरे से आगे बढ़ेगी। लगातार बेंचों के मामले से अलग होने के बाद इसे जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंपा गया है।
