March 8, 2026

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इन्हीं हथियारों से पाकिस्तान को चटवा दी थी धूल

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– दुश्मन के टिकवाए थे घुटने

असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक पर्व विजयादशमी के अवसर पर देश की पहली सुरक्षा पंक्ति कहलाने वाले सीमा सुरक्षा बल के 1055 तोपखाना रेजिमेंट परिसर में देशभक्ति और शौर्य-पराक्रम के साथ भक्ति भावना का मिश्रित वातावरण नजर आया। इस मौके पर रेजिमेंट में शस्त्र पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अधिकारियों के साथ जवानों ने विधिवत रूप से अपने शस्त्रों की पूजा-अर्चना की।

शस्त्रों को गंगाजल से पवित्र किए जाने के बाद मंत्रोच्चारण के बीच माल्यार्पण कर नमन किया गया। इसके साथ ही देवी दुर्गा और उनकी योगिनियों जया-विजया का स्मरण कर शस्त्रों की आरती भी उतारी गई। इस अवसर पर भारतमाता की जय के साथ अन्य नारों की गूंज होती रही। बल के अधिकारी शक्तिसिंह तंवर ने कहा कि इन्हीं हथियारों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

परम्परा: रामायण और महाभारत काल से  
ये हथियार हमारे लिए भगवान का आशीर्वाद हैं। हमारे देश में शस्त्र पूजन की परम्परा रामायण और महाभारत काल से चली आ रही है। इस मौके पर छोटे हथियारों से लेकर तोपों तक हर अस्त्र को गंगाजल से शुद्ध किया गया और तिलक लगाकर पूजा की गई। यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि दुश्मन का सामना करने के लिए सीमा प्रहरियों की तैयारी का संदेश भी है।

गौरतलब है कि गत मई में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तान के हमलों को नाकाम करने के साथ तोपखाना रेजिमेंट ने उसके अस्थाई बंकर और नाके ध्वस्त कर दिए थे। जवानों ने अपने पराक्रम से बताया था कि वे केवल देश की सीमाओं की निगरानी ही नहीं करते, समय आने पर दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का भी दमखम रखते हैं।

हम पूरी तरह से तैयार
जैसलमेर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के पास वर्तमान में अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा है। नाइट विजन कैमरों, ड्रोन और राडार सिस्टम से सीमापार की प्रत्येक गतिविधि पर करीबी नजर रखी जाती है। मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद तोपखाना रेजिमेंट हर परिस्थिति में दुश्मन को करारा जवाब देने में सक्षम है।

गौरतलब है कि सीमा सुरक्षा बल में तोपखाना रेजिमेंट का गठन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय हुआ था। तब से यह रेजिमेंट देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आज के दिन जवान अपने अस्त्र-शस्त्रों का पूजन कर परंपरा निभाते हैं और मनोबल भी बढ़ाते हैं।

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