March 9, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके ग्रुप पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सीमित है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण ने बताया कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर किया गया।

ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इसमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में फंड का गलत इस्तेमाल हुआ जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की निगाहें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर हैं जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़ा कर रहा है।

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