June 3, 2026

सरकारी डेटा लीक हुआ तो किससे करें शिकायत? जानिए आपके अधिकार

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नई दिल्ली ।  सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए शुरू किया गया री-इवैल्यूएशन पोर्टल इन दिनों चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पोर्टल के पेमेंट सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी और कथित साइबर हमले के कारण कुछ छात्रों को सिस्टम पर अनधिकृत पहुंच मिल गई थी। इसके चलते कई मामलों में री-इवैल्यूएशन फीस की राशि सामान्य शुल्क की जगह 1 रुपये से लेकर 67-68 हजार रुपये तक दिखाई देने लगी। मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने सरकारी पोर्टलों पर डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेटा लीक होने पर नागरिकों के क्या हैं अधिकार?
सरकारी पोर्टल या किसी संस्था से डेटा लीक होने की स्थिति में नागरिकों के अधिकार क्या हैं, इसे लेकर लोगों में कई सवाल हैं। भारत में अब डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू है, जो नागरिकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार देता है।

क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023?
भारत सरकार ने डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 लागू किया है। यह देश का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है। इस कानून का उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था उनकी अनुमति के बिना उनके डेटा का गलत इस्तेमाल न कर सके।

इस कानून के दायरे में आने वाली जानकारी में शामिल हैं

मोबाइल नंबर
आधार नंबर
बैंकिंग जानकारी
ईमेल आईडी
ऑनलाइन रिकॉर्ड
अन्य डिजिटल व्यक्तिगत जानकारी
डेटा लीक होने पर मिलते हैं ये अधिकार

DPDP एक्ट के तहत नागरिकों को अपने डेटा पर कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं।

डेटा की जानकारी मांगने का अधिकार
कोई भी व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका डेटा किस उद्देश्य से एकत्र किया गया है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।

डेटा में सुधार करवाने का अधिकार
अगर किसी व्यक्ति की जानकारी गलत है तो वह उसे अपडेट या सही करवाने की मांग कर सकता है।

डेटा हटाने का अधिकार
जरूरत पड़ने पर व्यक्ति अपने व्यक्तिगत डेटा को हटाने की मांग भी कर सकता है।

डेटा लीक की सूचना पाने का अधिकार
यदि किसी संस्था से डेटा लीक होता है तो प्रभावित व्यक्ति को इसकी जानकारी देना संस्था की जिम्मेदारी होती है।

डेटा लीक होने पर संस्था को क्या करना होगा?
कानून के अनुसार डेटा उल्लंघन होने पर संबंधित संस्था को बिना अनावश्यक देरी के प्रभावित लोगों को सूचना देनी होगी। इस सूचना में यह बताना जरूरी होगा डेटा लीक कैसे हुआ, इससे क्या नुकसान हो सकता है समस्या को ठीक करने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

किन संस्थाओं पर लागू होता है यह कानून?
यह कानून उन सभी संस्थाओं पर लागू होता है जो भारतीय नागरिकों का डिजिटल डेटा एकत्र करती हैं या उसका उपयोग करती हैं। इनमें शामिल हैं सरकारी विभाग, बैंक, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप, निजी कंपनियां, भारत के बाहर मौजूद वे संगठन भी इस कानून के दायरे में आ सकते हैं, जो भारतीय नागरिकों को सेवाएं देते हैं और उनका डेटा प्रोसेस करते हैं।

डेटा लीक होने पर कितना लग सकता है जुर्माना?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं।

250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
यदि कोई संस्था पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रहती है और इसके कारण डेटा लीक होता है, तो उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

200 करोड़ रुपये तक की सजा
यदि कोई संस्था डेटा उल्लंघन की जानकारी समय पर नहीं देती या बच्चों के डेटा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर 200 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। CBSE पोर्टल से जुड़ी हालिया घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सरकारी और निजी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। वहीं नागरिकों को भी अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि किसी भी डेटा लीक की स्थिति में वे उचित कार्रवाई कर सकें।

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