March 9, 2026

पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

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नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.

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