नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका
मौसम विभाग ने मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के ऊंचे हिस्सों में बारिश के साथ बिजली चमक सकती है और बर्फबारी भी हो सकती है। लुंबिनी और कर्णाली के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,377 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 5,326 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में 6,827 लोग घायल हुए हैं। बाढ़ के कारण 7,570 घर टूट गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी मुश्किलें पैदा हुई हैं।
प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के कारोबार और खासकर चीन के साथ होने वाले व्यापार पर भी पड़ा है। रसुवागढ़ी और तातोपानी सीमा मार्गों को नुकसान पहुंचने के कारण सामान से भरे करीब 500 से 600 कंटेनर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक नेपाली कंटेनर बाढ़ के पानी में बह चुके हैं। इससे सीमा के रास्ते होने वाली सामान की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
फंसे हुए सामान को वैकल्पिक रास्ते से आगे भेजने की कोशिश की जा रही है। करीब 176 ट्रकों को कोराला मार्ग से भेजने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इस रास्ते से सामान को पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन लग रहे हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।
बाढ़ से नेपाल को आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन में देश को चार लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक के नुकसान की बात सामने आई है। इसमें घरों, सड़कों तथा सरकारी और निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है। नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत तक और बढ़ सकता है।
नेपाल सरकार के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। सरकार के अनुमान के अनुसार देश के पुनर्निर्माण और टूटे हुए ढांचे की मरम्मत के लिए चार से पांच अरब डॉलर तक की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से नेपाल दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता मांग रहा है। ऐसे समय में भारी बारिश, आंधी और बर्फबारी की नई चेतावनी ने पहले से प्रभावित इलाकों में चिंता और बढ़ा दी है।
