कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
डीके शिवकुमार ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार के 100 दिन पूरे होने से ठीक पहले सतीश जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई का समय राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सतीश जारकीहोली जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि ईडी को मामले की जांच करनी है तो वह अपना काम कर सकती है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है और इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस को दबाव में नहीं ला सकती।
ईडी की टीम ने सतीश जारकीहोली, उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े करीब 18 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन परिसरों में बेंगलुरु और बेलगावी स्थित स्थान भी शामिल बताए गए हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की जा रही है।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की तैनाती भी की गई। अलग-अलग स्थानों पर चल रही तलाशी के बीच राज्य में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
अधिकारियों के अनुसार, ईडी की मौजूदा कार्रवाई विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के तहत दर्ज जांच से संबंधित है। यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का संबंध किसी पुराने धनशोधन मामले से नहीं है।
तलाशी अभियान के दौरान ईडी की टीम संबंधित परिसरों में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही है। जांच का केंद्र विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन से संबंधित पहलुओं पर है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई के संबंध में सतीश जारकीहोली के परिवार या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
मामले ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में देखते हुए भाजपा पर हमला बोला, जबकि ईडी की ओर से इसे फेमा के तहत चल रही जांच का हिस्सा बताया गया है। अब इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
