July 18, 2026

सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी

0
photo13-1784367023

आजमगढ़। जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र स्थित मोहनपुर पटवास गांव में सार्वजनिक तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के कई लोगों ने मंडलायुक्त को शिकायत पत्र सौंपते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, सांसद ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी स्तर की जांच कराने की बात कही है।

ग्रामीणों की ओर से शिकायत करने वाली गीता सरोज ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी।

तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, जिसका क्षेत्रफल 7.798 हेक्टेयर है और जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर फार्म हाउस बना दिया गया है। उनका कहना है कि वहां खेती और मछली पालन किया जा रहा है, जबकि पहले इस तालाब का उपयोग ग्रामीण और पशु करते थे। गीता सरोज का आरोप है कि सांसद ने करीब 50 बीघे तालाब क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के गरीब ग्रामीणों की जमीनों पर भी कब्जा कर लिया है।

धमकी और अवैध गतिविधियों के भी आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि फार्म हाउस के चारों ओर बिजली के तार लगाए गए हैं, कई बोरिंग कराई गई हैं तथा वहां अवैध मछली पालन और पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों ने सांसद के बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोते अभिषेक सरोज पर शराब के नशे में हंगामा करने और लोगों को धमकाने का भी आरोप लगाया है।

गीता सरोज का कहना है कि उनकी एक बीघा जमीन पर भी कब्जा कर पोखरा पाट दिया गया। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

सांसद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन का बैनामा शारदा विश्वकर्मा से करीब 3.5 से 4 बीघा कराया था और प्रशासन द्वारा कराई गई पैमाइश में उनकी भूमि सही पाई गई है। उन्होंने बताया कि अन्य जमीनें भी उन्होंने संबंधित मालिकों से नियमानुसार खरीदी हैं और किसी की भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है।

सांसद ने अपने परिजनों पर लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोपों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, मंडलायुक्त या तहसील प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए। उनका दावा है कि यदि एक इंच भी अवैध कब्जा साबित होता है तो वे लाखों रुपये का जुर्माना भरने के लिए तैयार हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *