March 8, 2026

स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

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नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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