जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल
नई दिल्ली। देश में होने वाली जनगणना 2027 (Census 2027) के दूसरे चरण (Second phase) यानी जनसंख्या गणना (Population Census) की प्रक्रिया इस बार पहले के मुकाबले काफी लंबी होगी। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने तक चलेगी। इसमें 15 दिनों का स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का समय भी शामिल है। इस चरण में लोगों से जाति समेत कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में सवालों की संख्या 29 थी। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं।
जनसंख्या गणना का यह चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। वहीं, पहले की जनगणनाओं में यह प्रक्रिया आमतौर पर 9 से 28 फरवरी के बीच महज 20 दिनों में पूरी की जाती थी। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्य किया जाएगा।
यूपी समेत चार राज्यों में 35 दिन चलेगी घर-घर जनगणना
अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम पहले रखा गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना का कार्यक्रम 35 दिनों का होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, देशभर में जनगणना 25 जनवरी से 27 फरवरी 2027 के बीच कराई जाएगी। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। मणिपुर में फिलहाल जनगणना की घोषणा नहीं की गई है। राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया पहले कराने की मांग के बाद जनगणना का काम रोक दिया गया था।
कब होगी स्व-गणना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया?
जनगणना 2027 के लिए लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का भी मौका मिलेगा। इसके लिए 10 से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) पहले ही 1 मार्च 2027 घोषित की जा चुकी है। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक संशोधन का चरण भी आयोजित किया जाएगा।
जनगणना में पूछे जाएंगे ये 40 सवाल
इस बार दूसरे चरण में सवालों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। इनमें जाति से जुड़ी जानकारी के अलावा परिवार और व्यक्तिगत पहचान से संबंधित कई जानकारियां भी शामिल होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के दौरान ये जानकारियां जुटाई जाएंगी:
– जाति से संबंधित जानकारी
– पति या पत्नी का नाम
– माता और पिता से जुड़ी जानकारी
– व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता
– स्थायी पता
– कोविड-19 टीकाकरण की जगह
– कुल बैंक खातों की संख्या
– मोबाइल नंबर
– आधार नंबर
– मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) नंबर
– पासपोर्ट नंबर
– ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
– मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी उपलब्ध होने पर शेयर की जा सकती है। वहीं, पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों से मांगा जाएगा। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें 62.32 करोड़ पुरुषों और 58.75 करोड़ महिलाओं सहित 1.21 अरब आबादी होने की बात कही गई थी। देश में उस समय 24.95 करोड़ परिवार थे।
मणिपुर में फिलहाल जनगणना नहीं
मणिपुर को जनगणना के मौजूदा कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। राज्य में विभिन्न वर्गों की ओर से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया कराने की मांग उठाई गई थी। इसके बाद वहां जनगणना की प्रक्रिया रोक दी गई। केंद्र सरकार की अधिसूचना में भी मणिपुर को फिलहाल बाहर रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।
