दिसंबर में फिर बढ़ सकता है रेपो रेट, 50 बेसिस प्वाइंट तक इजाफे का अनुमान
नई दिल्ली। महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, अगली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दर में 50 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी संभव है। अक्टूबर की एमपीसी बैठक के मिनट्स से केंद्रीय बैंक का रुख पहले के मुकाबले अधिक सख्त नजर आया है। बढ़ती महंगाई और रुपये पर दबाव को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दिसंबर की एमपीसी बैठक में 50 बेसिस प्वाइंट तक नीतिगत बदलाव की संभावना जताई गई है। यह बदलाव सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के रूप में हो सकता है। दूसरा विकल्प रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) कॉरिडोर में 25 बेसिस प्वाइंट के समायोजन का है।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ रहा है और रुपये में कमजोरी बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई को हालात पर करीबी नजर रखते हुए संतुलित नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।
नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद
डॉ. घोष ने कहा कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई की सतर्क निगरानी जरूरी है।
डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव के मुताबिक, अक्टूबर की एमपीसी बैठक के बाद आरबीआई का सख्त रुख स्पष्ट हुआ है। बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई और नीतिगत रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला गया। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने महंगाई के बढ़ते दबाव और मजबूत आर्थिक वृद्धि को ब्याज दर बढ़ाने के प्रमुख कारणों के रूप में देखा।
महंगाई के जोखिम पर पहले से कदम उठाने पर जोर
महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए समय रहते कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। हालांकि, कुछ सदस्य रेपो रेट में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के पक्ष में रहे और लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति के संकेत देने से बचते दिखाई दिए।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि महंगाई का दबाव अधिक व्यापक रूप लेता दिख रहा है। राधिका राव के अनुसार, यदि चालू कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई दर करीब 6 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो दिसंबर में ब्याज दर में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजार के उपायों से रुपये को सहारा
बाजार में बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े उपायों के बाद रुपये में मजबूती आई है। इन कदमों के असर से इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया करीब डेढ़ प्रतिशत मजबूत हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम अब भी चुनौती बने हुए हैं।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में विदेशी निवेश बढ़ने से भी रुपये को सहारा मिला है। फिलहाल रुपया बाहरी घटनाक्रमों पर सीमित प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
