राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन का नया सिस्टम, हर चरण की वीडियोग्राफी और 8 सदस्यीय निगरानी टीम तैनात
नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ नहीं खोला जाएगा। प्रत्येक दानपात्र को अलग-अलग दिन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाली किया जाएगा। सबसे पहले गणना कक्ष से खाली बक्सा निकाला जाएगा, जिसे निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच संबंधित दानपात्र तक ले जाया जाएगा। इसके बाद दानराशि उस बक्से में रखी जाएगी और उसे पूरी तरह सीलबंद कर पुनः गणना कक्ष तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान पूरी प्रक्रिया 360 डिग्री कैमरों और एसएलआर कैमरों से रिकॉर्ड की जाएगी ताकि हर गतिविधि का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
ट्रस्ट ने इस कार्य के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफरों की नियुक्ति की है। वहीं पूरी प्रक्रिया की निगरानी आठ सदस्यीय टीम करेगी, जिसमें दो बैंक कर्मचारी, दो ट्रस्ट प्रतिनिधि, दो एसआईएस सुरक्षा कर्मी और अन्य अधिकृत सदस्य शामिल रहेंगे। गणना कक्ष में पहुंचने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी दान से भरे बक्सों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीलबंद करेंगे। इसके बाद धनराशि की गणना और बैंकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इस बीच ट्रस्ट के कोष प्रबंधन एवं निगरानी समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच किसी प्रकार का कोई विवाद या गतिरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान की जमा और निकासी की प्रक्रिया पहले की तरह सामान्य रूप से जारी है और मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है। ट्रस्ट के सचिव पद को लेकर उन्होंने बताया कि दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में नए सचिव के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उधर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में एसआईटी की जांच का सामना कर रहे ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा करीब एक महीने तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने के बाद फिर सक्रिय नजर आने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लिया है तथा रामनगरी के संतों और धर्माचार्यों से मुलाकातें भी की हैं। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर चुकी हैं और मंदिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी जांच जारी है।
ट्रस्ट का मानना है कि नई निगरानी व्यवस्था से दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा पहले से अधिक मजबूत होगा। आधुनिक तकनीक, बहुस्तरीय निगरानी और बैंकिंग प्रक्रिया की सीधी भागीदारी के जरिए अब चढ़ावे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
