नीट परीक्षा की साख पर सवाल: 5 मेडिकल छात्र समेत 24 आरोपी पकड़े गए, 30 लाख में होता था सौदा
जानकारी के अनुसार आरोपियों ने असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर्स को परीक्षा में बैठाने की सुनियोजित साजिश रची थी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों पर मौजूद बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगाई गई। जांच में सामने आया है कि फर्जी परीक्षार्थियों को प्रवेश दिलाने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत भी थी।
पुलिस के मुताबिक लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से कुल सात सॉल्वर पकड़े गए। इनके अलावा बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी और अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दिलाने के लिए 30 लाख रुपए तक का सौदा किया जाता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच में पता चला कि वह कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और एक-एक कर पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था। वहीं इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड अर्पित राज बताया जा रहा है जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र है। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्पित राज का नाम वर्ष 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि परीक्षा माफिया लगातार नए तरीकों से सिस्टम को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में सॉल्वर गैंग और पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करती हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उन कदमों पर टिकी है जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाएंगे।
