महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत: 17 में से 16 सीटों पर कब्जा, नासिक में बागी ने पलटा खेल
18 जून को हुए मतदान के बाद सोमवार को घोषित परिणामों में भाजपा सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। पार्टी ने कुल 9 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं शिवसेना और एनसीपी के उम्मीदवारों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। इससे पहले छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत दिखाई दी।
हालांकि इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा नासिक सीट की रही। यहां भाजपा के बागी नेता गोकुल गिट्टे ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को पराजित कर दिया। गिट्टे को भाजपा से टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया। उनकी जीत को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह परिणाम दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर बागी नेताओं की ताकत कई बार गठबंधन की रणनीति पर भारी पड़ सकती है।
चुनाव परिणामों में नांदेड़ सीट से भाजपा के अमरनाथ राजुरकर ने जीत दर्ज की। नागपुर उपचुनाव में भाजपा के डॉ. राजीव पोतदार विजयी रहे। भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्राह्मणकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट, जलगांव से नंदकिशोर महाजन, सांगली-सतारा से धैर्यशील कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे ने जीत हासिल की।
वहीं परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने विजय हासिल कर महायुति की सफलता में योगदान दिया। इन नतीजों ने विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण सीटों पर उनके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव से पहले ही छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इनमें वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली, यवतमाल, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, ठाणे-पालघर और अहिल्यानगर जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। विपक्ष इन सीटों पर प्रभावी चुनौती खड़ी नहीं कर पाया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव के परिणाम आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के लिए भी संकेत दे सकते हैं। हालांकि नासिक में बागी उम्मीदवार की जीत ने यह भी दिखाया है कि टिकट वितरण और स्थानीय असंतोष भविष्य में गठबंधन दलों के लिए चुनौती बन सकता है।
कुल मिलाकर महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। लेकिन नासिक का परिणाम यह भी याद दिलाता है कि राजनीति में कभी-कभी एक बागी उम्मीदवार भी बड़े समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
