पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी खींचतान: भूपेश बघेल की बैठकों से दूर रहा चन्नी खेमा, संगठन में मतभेद हुए उजागर
मंगलवार को भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं, हालांकि चन्नी समर्थक नेताओं ने इन बैठकों से दूरी बनाए रखी। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चन्नी का समर्थन कर रहे नेताओं की बघेल से मुलाकात नहीं होने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अगले एक-दो दिनों में भूपेश बघेल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि बघेल अधिकांश समितियों के अध्यक्षों से चर्चा कर चुके हैं और अब केवल चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी तथा कोर कमेटी के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा से बैठक बाकी है।
राजा वडिंग के अनुसार, चन्नी ने पहले ही बघेल को सूचित कर दिया था कि वे एक-दो दिन के लिए शहर से बाहर रहेंगे। हालांकि चन्नी के करीबी नेताओं ने भी अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की है। चन्नी के निकट माने जाने वाले भारत भूषण आशु भी बैठकों से दूर रहे।
गौरतलब है कि भूपेश बघेल 6 जुलाई को पंजाब के पांच दिवसीय दौरे पर चंडीगढ़ पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने किया। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद बघेल ने सबसे पहले प्रताप सिंह बाजवा के साथ बंद कमरे में बैठक की।
मंगलवार सुबह बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार वेरका के साथ नाश्ते पर मुलाकात की। इसके बाद वेरका सीधे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मिलने पहुंचे। इसे कांग्रेस नेतृत्व की ओर से असंतुष्ट नेताओं के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, प्रताप सिंह बाजवा ने भरोसा जताया कि पार्टी के भीतर मौजूद सभी मतभेद जल्द दूर कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को अपनी शिकायतों के बावजूद पार्टी की मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए। बाजवा ने दावा किया कि पंजाब की जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस उसके लिए सबसे मजबूत विकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ती है तो जनता का विश्वास जरूर मिलेगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर फैसला चुनाव परिणाम आने और सरकार बनने की स्थिति में किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो पार्टी के लिए अनावश्यक विवाद का कारण बनें।
