July 1, 2026

भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

0
28-1782902431
नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *