August 12, 2026

ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

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नई दिल्ली । भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। खुफिया इनपुट के हवाले से सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि नियंत्रण रेखा के पार 500 से अधिक आतंकियों के भारत में घुसपैठ के मौके का इंतजार करने की आशंका है। इस बीच पाकिस्तान की रणनीति में भी बदलाव की बात सामने आई है, जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है। पहले अलग-अलग आतंकी संगठनों के अपने कमांड ढांचे और नेतृत्व के माध्यम से गतिविधियां संचालित होने की बात कही जाती थी। अब इनके बीच तालमेल को एक केंद्रीय व्यवस्था के तहत मजबूत किए जाने का दावा किया जा रहा है।

खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी नेटवर्क को लेकर पुनर्गठन किया गया है। इसका कथित उद्देश्य अलग-अलग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और उनकी गतिविधियों पर केंद्रीय स्तर से निगरानी बढ़ाना है। हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता नियंत्रण रेखा के पार मौजूद संभावित आतंकियों की संख्या को लेकर है। रिपोर्ट में 500 से अधिक आतंकियों के घुसपैठ के अवसर की प्रतीक्षा करने की आशंका जताई गई है। ऐसे इनपुट के बाद सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है।

बताया गया है कि हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जबकि जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी का आकलन किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे पाकिस्तान की बदली हुई रणनीति के संदर्भ में देख रही हैं।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने पर अधिक जोर दे रहा है। स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और आतंकी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के साथ स्थानीय नेटवर्क को जोड़ना बताया जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ता है तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती का स्वरूप बदल सकता है। इसी वजह से सीमा सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आतंकवाद के लिए होने वाली भर्ती को रोकना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सतर्क रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच इस तरह के इनपुट को और गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी खुफिया आकलन को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी होती है।

फिलहाल 500 से अधिक आतंकियों की संभावित मौजूदगी और आतंकी संगठनों पर आईएसआई के बढ़ते नियंत्रण से जुड़े दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर गतिविधियों, घुसपैठ के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

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