July 21, 2026

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

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नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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