राम मंदिर दान हेराफेरी पर नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- यह कलंक है, हम क्षमाप्रार्थी हैं, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह मामला मंदिर प्रशासन और प्रबंधन से जुड़ा है तथा इसे पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। उनके अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसे बनाए रखने के लिए पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रशासनिक ढांचे पर भी जानकारी देते हुए बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चयन करेगी और अंतिम निर्णय उसी के माध्यम से लिया जाएगा। उनका कहना था कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था मंदिर संचालन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति पर जानकारी देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मुख्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पुराने मंदिर परिसर को स्मारक के रूप में विकसित करने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और केवल कुछ अंतिम व्यवस्थाएं शेष हैं। उनका अनुमान है कि मंदिर निर्माण का अंतिम चरण इस महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर से जुड़ी अन्य विकास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। इनमें विस्तृत चहारदीवारी का निर्माण और मंदिर परिसर के बाहर प्रस्तावित ऑडिटोरियम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों के वर्ष के अंत तक पूर्ण होने की संभावना जताई गई है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
राम कथा संग्रहालय परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं की विषय-वस्तु तैयार कर ली गई है। अब डिजिटल प्रस्तुति, ऑडियो-विजुअल सामग्री और आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भगवान राम के जीवन, भारतीय संस्कृति और मंदिर आंदोलन से जुड़ी जानकारी आधुनिक और आकर्षक तरीके से उपलब्ध कराई जा सके।
नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर को भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का विशिष्ट प्रतीक बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भविष्य में लगातार बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लंबे सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का परिणाम है। उनके अनुसार, सनातन परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या का यह मंदिर विशेष महत्व रखता है और देश-विदेश से आने वाले भक्तों का विश्वास बनाए रखना ट्रस्ट और प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
