August 2, 2026

श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर पहुंचीं कुणाल खेमू की बहन, बदली हवेली और बीते दिनों की कहानी की साझा

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नई दिल्ली ।अभिनेता कुणाल खेमू के परिवार का श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर एक बार फिर चर्चा में है। वर्षों बाद उनकी बहन करिश्मा खेमू अपने परिवार के साथ इस घर पहुंचीं और वहां बिताए गए बचपन के दिनों से जुड़ी यादों को साझा किया। इस यात्रा का एक भावनात्मक वीडियो सामने आया है, जिसमें परिवार अपने पुराने घर के हर हिस्से को देखते हुए अतीत की स्मृतियों को दोबारा जीता नजर आता है। यह दौरा केवल एक मकान तक लौटने का नहीं, बल्कि उन यादों और भावनाओं से दोबारा जुड़ने का अवसर बन गया, जो समय के साथ पीछे छूट गई थीं।

वीडियो में करिश्मा खेमू अपने पुश्तैनी घर के अलग-अलग हिस्सों को दिखाते हुए बताती हैं कि कभी यह पूरा भवन उनके परिवार का था, लेकिन अब समय के साथ इसकी संरचना और उपयोग दोनों बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले जिन कमरों में परिवार के सदस्य साथ रहते थे, वे अब अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो चुके हैं और उनमें अन्य लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद घर का हर कोना उनके बचपन की किसी न किसी याद को आज भी संजोए हुए है।

करिश्मा की मां ने भी इस यात्रा के दौरान घर से जुड़ी कई पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद परिवार की शुरुआती जिंदगी इसी घर की ऊपरी मंजिल पर बीती थी। उन्होंने उन कमरों की ओर इशारा करते हुए पुराने दिनों को याद किया, जहां परिवार एक साथ समय बिताता था। घर की सीढ़ियां, आंगन और कमरे आज भी उन्हें बीते वर्षों की घटनाओं की याद दिलाते हैं। परिवार ने बताया कि इस मकान का हर हिस्सा किसी न किसी व्यक्तिगत अनुभव और पारिवारिक रिश्ते से जुड़ा हुआ है।

समय के प्रभाव की छाप भी इस पुश्तैनी भवन पर स्पष्ट दिखाई देती है। हवेली की दीवारों का रंग फीका पड़ चुका है, लकड़ी की संरचनाओं पर उम्र के निशान साफ नजर आते हैं और कई हिस्सों में मरम्मत की आवश्यकता महसूस होती है। पारंपरिक कश्मीरी स्थापत्य शैली में बने इस मकान की लकड़ी की बालकनी, नक्काशीदार खंभे और पुराने दरवाजे आज भी इसकी ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखते हैं। हालांकि लंबे समय के दौरान भवन की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है, लेकिन इसकी मूल संरचना अब भी अतीत की कहानी बयान करती है।

करिश्मा ने बताया कि कभी पूरा परिवार जिस विशाल घर में एक साथ रहता था, आज वह कई छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि कई कमरे अब बंद रहते हैं और कुछ हिस्सों में किरायेदार निवास करते हैं। घर की सीढ़ियों और गलियारों में पहले जैसी रौनक नहीं रही, लेकिन वहां पहुंचते ही बचपन की अनेक यादें स्वतः ताजा हो गईं। परिवार के लिए यह यात्रा भावनात्मक अनुभव साबित हुई, क्योंकि वर्षों बाद वे अपने उस घर की दहलीज पर लौटे, जहां उनके जीवन की शुरुआती स्मृतियां जुड़ी हुई हैं।

कुणाल खेमू का जन्म श्रीनगर में हुआ था और बचपन में ही उनका परिवार घाटी छोड़कर मुंबई आ गया था। इसके बाद उन्होंने फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि जीवन की नई यात्रा शुरू होने के बावजूद श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर उनके परिवार की पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा। करिश्मा खेमू की इस यात्रा ने एक बार फिर उन भावनात्मक संबंधों को सामने लाया है, जो किसी व्यक्ति और उसके पैतृक घर के बीच वर्षों बाद भी कायम रहते हैं। यह कहानी केवल एक भवन की नहीं, बल्कि स्मृतियों, पारिवारिक विरासत और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना को भी दर्शाती है।

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