July 2, 2026

हनीमून मर्डर केस में नया मोड़, सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघालय पुलिस, शुक्रवार को होगी अहम सुनवाई

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नई दिल्ली । चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। इस मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस ने शीर्ष अदालत से निचली अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के फरार होने की आशंका को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

यह मामला वर्ष 2025 में सामने आया था, जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ विवाह के कुछ दिनों बाद हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे। यात्रा के दौरान चेरापूंजी क्षेत्र में राजा अचानक लापता हो गए थे। व्यापक तलाश के बाद उनका शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिसके बाद मामले ने हत्या का रूप ले लिया और जांच एजेंसियों ने विस्तृत पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप दर्ज किए। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की और दावा किया कि वारदात पूर्व नियोजित थी तथा इसे आर्थिक लाभ और निजी कारणों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया गया था। बाद में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।

हालांकि, मामले में एक तकनीकी त्रुटि ने कानूनी प्रक्रिया को नया मोड़ दे दिया। गिरफ्तारी के दौरान तैयार किए गए अरेस्ट मेमो में हत्या से संबंधित लागू धारा के स्थान पर गलत धारा दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, दस्तावेज में कुछ अन्य तथ्यात्मक त्रुटियां भी सामने आईं। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को कानून के अनुरूप सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिल सकी। उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधिक प्रक्रिया का पालन प्रत्येक आपराधिक मामले में अनिवार्य है और जांच एजेंसियों से अपेक्षित सावधानी बरतना आवश्यक है।

अब मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गिरफ्तारी मेमो में दर्ज त्रुटियां जानबूझकर नहीं की गई थीं, बल्कि यह प्रशासनिक और टाइपिंग संबंधी चूक का परिणाम थीं। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराध से जुड़े मामले में केवल तकनीकी भूल के आधार पर आरोपी को राहत देना न्यायहित में उचित नहीं माना जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों, अपराध की प्रकृति और जांच की गंभीरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं तथा गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई तकनीकी त्रुटियों का इस मामले पर कितना कानूनी प्रभाव पड़ता है। इस निर्णय का असर न केवल राजा रघुवंशी हत्याकांड की आगे की सुनवाई पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं की व्याख्या के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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