MP हाईकोर्ट के जज अवनिंद्र सिंह की अनोखी मिसाल: GPF के पूरे 1.1 करोड़ रुपये PM CARES Fund को देंगे
जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने विदाई समारोह में अपने जीवन और न्यायिक सेवा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि रिटायरमेंट उनके लिए जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। उनके मुताबिक व्यक्ति केवल पूजा करके ही ईश्वर की सेवा नहीं करता बल्कि समाज और धरती पर मौजूद जीवन तथा अन्य संसाधनों की देखभाल करके भी अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी पत्नी के साथ एक और महत्वपूर्ण संकल्प लिया है।
जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने मृत्यु के बाद अपने शरीर को मेडिकल स्टडी और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दान करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए दोनों ने मेडिकल कॉलेज में संकल्प लिया है। उनका कहना है कि मृत्यु के बाद भी शरीर का उपयोग अगर चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए हो सके तो इससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिल सकता है। उनके इस निर्णय को विदाई समारोह में मौजूद लोगों ने भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा।
अपने भाषण के दौरान जस्टिस सिंह ने अपने बचपन की यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां के निधन के बाद उनकी मौसी ने उन्हें अपने बेटे की तरह पाला। उन्होंने अपने पिता अपनी मौसी और मौसी के पति के प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस सिंह ने बताया कि उनकी मौसी हमेशा उन्हें मेहनत और ईमानदार प्रयास के महत्व की सीख देती थीं। उनके अनुसार जीवन में सफलता का कोई आसान रास्ता नहीं होता और मेहनत तथा सच्ची कोशिश के बिना हासिल की गई सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रहती।
जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह का न्यायिक करियर भी लंबा रहा है। उन्होंने 31 मई 1990 को सिविल जज क्लास-2 के तौर पर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में अलग अलग जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2018 में उन्हें छतरपुर में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर नियुक्त किया गया। इसके बाद 2022 में उन्होंने धार में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद 1 मई 2023 को जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। करीब तीन साल तक हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी निभाने के बाद वह 18 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। अपने विदाई भाषण के अंत में उन्होंने रिटायरमेंट को किसी यात्रा का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय एक नए मंच से समाज के लिए काम करने की शुरुआत बताया।
करीब 1.1 करोड़ रुपये की GPF राशि दान करने और पत्नी के साथ देहदान का संकल्प लेने की घोषणा ने उनके विदाई समारोह को खास बना दिया। उनका यह फैसला न्यायिक सेवा से विदाई के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को आगे भी जारी रखने की उनकी सोच को सामने रखता है।
