11 सितंबर के बाद मुंबई में फिर जुटेगा मराठा समाज, मनोज जरांगे ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी
मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।
मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्रियों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भी जरांगे से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के साथ एमएलसी प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। सरकार की ओर से जरांगे की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने या कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील की गई। सरकार ने यह भी बताया कि करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड अब तक खोजे जा चुके हैं और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि इन आश्वासनों के बावजूद जरांगे अपने आंदोलन को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हुए।
जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों से 4 सितंबर से कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड खून के रिश्तों और वंशावली से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पात्र लोग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुनबी समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के अंतर्गत आता है। जरांगे की प्रमुख मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।
इसके अलावा जरांगे की मांगों में सतारा गजट के आधार पर आरक्षण लागू करना आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेना और आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी तथा आर्थिक सहायता देना भी शामिल है। इन मांगों को लेकर सरकार और जरांगे के बीच बातचीत जारी है लेकिन फिलहाल किसी अंतिम समाधान तक बात नहीं पहुंची है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में आने वाली मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा है कि सरकार मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन किसी दूसरे वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। ऐसे में सरकार के सामने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।
अब सबकी नजर 11 सितंबर पर टिकी है। जरांगे इसे अपना आखिरी भूख हड़ताल बता चुके हैं। उनका साफ कहना है कि अगर तय समय तक मांगों पर अमल नहीं हुआ तो 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन किया जाएगा। इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या 11 सितंबर से पहले कोई समाधान निकलता है इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर रहेगी।
