पाकिस्तान से बातचीत पर मणिशंकर अय्यर का सवाल, बोले- सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं?
नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने केंद्र की एनडीए सरकार पर सवाल उठाए हैं। रविवार को पांचवें ‘हल्ला बोल कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए अय्यर ने कहा कि सरकार के पास पाकिस्तान के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने का साहस है, लेकिन दोनों देशों के बीच विवादों के समाधान के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की इच्छाशक्ति नहीं है।
अय्यर ने भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद दोबारा शुरू करने की वकालत करते हुए अटारी-वाघा सीमा पर बातचीत का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अतीत के मुद्दों को लेकर लगातार बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके मुताबिक, बातचीत के जरिए यह तय किया जाना चाहिए कि किन मुद्दों का समाधान संभव है और किनका फिलहाल नहीं।
‘सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो बात क्यों नहीं?’
अय्यर ने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो फिर उसके साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने का साहस क्यों नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि भारत पाकिस्तान से बात क्यों नहीं कर सकता और दोनों देशों के बीच दोस्ती की कोशिश क्यों नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी पूछा कि दुनिया में क्या कोई ऐसा देश है, जिसके साथ भारत पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा सहज हो सकता है? साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान के लिए भी भारत से ज्यादा आसानी से बातचीत करने वाला कोई दूसरा देश है?
अटारी-वाघा सीमा पर टेबल लगाने का सुझाव
भारत-पाकिस्तान के बीच पहले हुई बातचीत की प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए अय्यर ने कहा कि दोनों देशों को फिर से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अटारी-वाघा सीमा पर ही बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया।
अय्यर ने कहा कि सीमा पर एक टेबल रखी जा सकती है, ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए पाकिस्तान से बाहर आने की जरूरत न पड़े और भारतीय प्रतिनिधियों को भी बातचीत के लिए भारत से बाहर न जाना पड़े। उनके मुताबिक, इसी जगह से संवाद को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर समाधान निकलता है, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, उन्हें फिलहाल लंबित रखा जा सकता है और माहौल बदलने के बाद उन पर दोबारा चर्चा की जा सकती है।
‘अतीत पर बहस करना विदेश नीति नहीं’
अय्यर ने कहा कि अतीत की घटनाओं को लेकर बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकल सकता है, भले ही इसमें कितना भी समय क्यों न लगे।
उन्होंने अमेरिका और रूस के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने रूस के साथ अपने मतभेदों के बावजूद राजनयिक संबंध नहीं तोड़े और बातचीत का रास्ता खुला रखा। अय्यर ने कहा कि समझदार देश एक-दूसरे से बात करते हैं, जबकि बातचीत बंद करने से समस्याओं का समाधान नहीं होता।
महबूबा मुफ्ती की सलाह का किया जिक्र
देश के राजनीतिक हालात से जुड़े सवाल पर अय्यर ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की उस सलाह का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कश्मीर के नेताओं से एकजुट होने की बात कही थी।
अय्यर ने कहा कि जिस तरह कश्मीर के मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के बजाय एकजुट होकर अपनी बात रखने की जरूरत है, उसी तरह राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में भी गैर-हिंदुत्व राजनीतिक समूहों को एकजुट होना होगा।
उन्होंने दावा किया कि यदि वे दिल्ली में सत्ता में होते तो जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा मिल गया होता और संभवतः अनुच्छेद 370 तथा 35ए भी किसी बदले हुए स्वरूप में वापस आ सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर प्रगति चाहिए तो असहमत लोगों को एकजुट होना होगा और ऐसी एकजुटता से पाकिस्तान के साथ भी नई पहल की जा सकती है।
भारत-पाक संबंधों पर अय्यर का पुराना रुख
पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत मणिशंकर अय्यर पहले भी करते रहे हैं। 2024 में उन्होंने भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा को लेकर भी लिखा था कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद संवाद ही संबंध सुधारने का रास्ता है। हालांकि उन्होंने उस समय भी स्पष्ट किया था कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं और कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं हैं।
वहीं, भारत सरकार का हालिया रुख यह रहा है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल जरूरी है। इसके बावजूद भारत ने सितंबर 2026 में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को इस्लामाबाद भेजा था।
