June 30, 2026

उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए ठोकी दावेदारी

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नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। इस राजनीतिक बदलाव को शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि सचिन अहीर को लंबे समय से आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि उन्हें नई राजनीतिक जिम्मेदारी देने की तैयारी पहले से ही की जा चुकी थी। दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी ने इस पद के लिए जे. एम. अभ्यंकर को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में उपसभापति का चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

सचिन अहीर का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े और फिर अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए। वर्ष 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ बने रहने का फैसला किया था। हालांकि अब उनका शिंदे गुट में जाना महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन अहीर का शिवसेना में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना गया था। विशेष रूप से मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे के चुनाव अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा में रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ ने उस समय पार्टी को लाभ पहुंचाया था। ऐसे नेता का अब प्रतिद्वंद्वी खेमे में जाना उद्धव ठाकरे के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

हाल के महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं लगातार तेज रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के नए राजनीतिक विकल्प तलाशने और खेमे बदलने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसी बीच सचिन अहीर का फैसला इस बहस को और अधिक बल देता है कि राज्य की राजनीति अभी भी पुनर्संतुलन के दौर से गुजर रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल विधान परिषद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुंबई और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। खासकर शिवसेना (यूबीटी) के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं शिंदे गुट इसे अपने राजनीतिक विस्तार और संगठनात्मक मजबूती के रूप में देख रहा है।

आने वाले दिनों में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद का चुनाव और उसके परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं और विभिन्न दल भविष्य की रणनीति को लेकर सक्रिय नजर आ रहे

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