कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, चारों सीटों पर हारी पार्टी; बैलेट पेपर पर भी उठे सियासी सवाल
कर्नाटक में भाजपा और JDS ने मिलकर चुनाव लड़ा था। परिणाम में भाजपा ने उत्तर पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र दक्षिण पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। वहीं बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट JDS के खाते में गई। चारों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को हराया। रंगनाथ को 10 हजार 810 वोट मिले जबकि पुट्टन्ना को 9 हजार 902 वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर जीत के बाद JDS नेताओं ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और बैलेट पेपर से मतदान को लेकर उसके रुख पर सवाल उठाए। पार्टी नेता निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस EVM को लेकर आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि चुनाव बैलेट पेपर से हुआ था। उन्होंने भाजपा और JDS के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई भी दी।
उत्तर पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य शशिल जी नामोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को हराया। नामोशी को 15 हजार 596 वोट मिले जबकि मट्टूर को 12 हजार 299 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 3 हजार 297 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा ने अपना प्रभाव बरकरार रखा।
दक्षिण पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के केएम सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंते मठ को बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एसवी संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिंबिकई को हराया। इन दोनों सीटों पर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने अपना प्रदर्शन मजबूत किया।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का आंकड़ा भी उल्लेखनीय रहा। यहां 81.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 27 हजार 405 मतदाताओं में से 22 हजार 468 लोगों ने मतदान किया। इनमें 21 हजार 56 मत वैध पाए गए जबकि 1 हजार 857 मत अवैध घोषित किए गए।
कर्नाटक के इन नतीजों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी विधान परिषद की चारों सीटें नहीं जीत सकी। दूसरी ओर भाजपा और JDS गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत हासिल की। विपक्ष अब इन परिणामों को कांग्रेस के चुनावी दावों पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि विधान परिषद के इन चुनावों के नतीजों से पूरे राज्य के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग आम विधानसभा चुनाव से अलग है।
