मजबूत सुरक्षा: पाक सीमा पर ड्रोन-रॉकेट हमलों से निपटेगा

भारतीय सेना ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मिशन सुदर्शन चक्र के लिए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सेना ने छह एके-630 एयर डिफेंस गन खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। यह गन सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार जैसे हमलों को नाकाम करने में सक्षम है। इसे पाक सीमा के पास आबादी व धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा।
परीक्षणों में सफल : सेना अधिकारियों के अनुसार, एके-630 गन सिस्टम को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एडवांस्ड वेपन एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड से खरीदा जाएगा। मई में हुए परीक्षणों में इस गन ने प्रैक्टिस एरियल टार्गेट्स को सफलतापूर्वक नष्ट किया था। हालांकि कुछ तकनीकी सुधार किए जाएंगे। हालिया संघर्ष में पाकिस्तान की ओर से नागरिकों और धार्मिक स्थलों पर किए गए हमलों के बाद इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी।
एयर लिटोरल की सुरक्षा की जरूरत: थल सेना के ऊपर लगभग 10,000 मीटर तक फैला निचला वायुमंडलीय क्षेत्र यानी एयर लिटोरल युद्ध में बेहद अहम माना जाता है। यही क्षेत्र लगातार सेना के हेलीकॉप्टर, आर्टिलरी रॉकेट और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के इस्तेमाल में आता है और जमीनी अभियानों का तत्काल हवाई घेरा बनाता है। सीमावर्ती इलाकों में यह जोन कस्बों, गांवों, स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों को भी कवर करता है, इसलिए इसकी सुरक्षा रणनीतिक के साथ मानवीय दृष्टि से भी बेहद जरूरी है।
खास:
फायरिंग रेट: हाइ रेट; तकरीबन 3,000 राउंड प्रति मिनट तक।
टार्गेट टाइप: ड्रोन, रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार (यूआरएएम) जैसे हवाई हमलों का मुकाबला करने में सक्षम।
प्रभावी मारक क्षमता: लगभग 4 किलोमीटर।
कॉन्ट्रोल सिस्टम: हर मौसम में काम करने वाला ऑल-वेदर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम लगा होगा।
तैनाती: ट्रेलर/मोबाइल माउंट पर रखा जा सकेगा, इसलिए रिलेबल और तेज तैनाती योग्यता। हाई-रेट फायरिंग और क्विक रिएक्शन कैपेसिटी के कारण सीमा सुरक्षा और भीड़-भाड़ वाले नागरिक इलाकों की रक्षा के लिए उपयुक्त।
