September 12, 2026

कचरे और गंदगी से बेहाल मुंबई पर हाईकोर्ट नाराज, 26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगकर दी कड़ी चेतावनी

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नई दिल्ली ।मुंबई में कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नगर निकाय को सख्त चेतावनी दी। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहा जाता है, लेकिन सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे की स्थिति इस दावे पर सवाल खड़े करती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर में जगह-जगह कचरा और गंदगी दिखाई दे रही है। अदालत ने BMC की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या नगर निकाय की मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है। अदालत के मुताबिक, सफाई व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की स्थिति पैदा न हो और जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का प्रभावी तरीके से पालन करें।

हाईकोर्ट ने BMC को मुंबई के सभी 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा है। अदालत का यह निर्देश शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी अपना काम नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी। कोर्ट ने कहा कि यदि वार्ड अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अवमानना की कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसके साथ ही BMC को सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए आखिरी मौका दिए जाने की बात कही गई।

कचरे की समस्या पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति का भी जिक्र किया। कोर्ट ने इस संदर्भ में सिंगापुर के सख्त नियमों का उदाहरण दिया। अदालत ने कहा कि वहां लोग केवल निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालते हैं और नियमों के पालन पर जोर दिया जाता है। मुंबई में भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर अदालत ने जोर दिया।

हाईकोर्ट ने सफाई व्यवस्था के लिए स्पष्ट और प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने की आवश्यकता बताई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गंदगी दिखाई दे रही है, तो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहने का आधार क्या है। अदालत की सख्ती से स्पष्ट है कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से जुड़े प्रदूषण के मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आई टिप्पणियों में अदालत ने नगर निकाय की जिम्मेदारी और अधिकारियों की जवाबदेही को प्रमुखता दी। BMC के सामने अब शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार करने और वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित करने की चुनौती है।

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