October 26, 2026

सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। कोंटा जनपद पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा की बैठक हुई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों और स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

ग्राम सभा की ओर से बाहरी पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके लिए पुनपल्ली गांव में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर धर्म बदल चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी ग्राम सभा की जमीन नहीं दी जाएगी। ग्राम सभा ने तय किया है कि चर्च, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

ग्राम सभा के फैसलों की जानकारी जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने दी। उन्होंने बताया कि विशेष ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में ‘शांति और न्याय समिति’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधियों के लिए गांव में आता है तो उसे सबसे पहले समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने स्थानीय स्तर पर विवादों से निपटने के लिए भी इस समिति की व्यवस्था की है।

इन फैसलों में पेसा कानून का भी उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत की रक्षा करना है।

ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि उसके फैसलों से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय नियमों का सम्मान करने की अपील की गई है। इस फैसले के तहत विशेष रूप से ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान किए गए हैं। सूचना-पट्ट के जरिए धार्मिक गतिविधियों और बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।

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